50 शाखाएं, 115 समितियां… मगर एटीएम सिर्फ 7 — ‘डिजिटल नंबर-वन’ का गणित समझ से बाहर
प्रेसवार्ता के दौरान सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह ने स्वयं स्वीकार किया कि मुजफ्फरनगर और शामली जैसे दो बड़े जनपदों में फैले जिला सहकारी बैंक की कुल 50 शाखाएं संचालित हैं। यह संख्या अपने आप में छोटी नहीं मानी जा सकती, लेकिन जब इसी नेटवर्क के साथ एटीएम की संख्या मात्र 7 बताई गई तो उपस्थित पत्रकारों के बीच हलचल स्वाभाविक थी।
दोनों जनपदों में लगभग 115 सहकारी समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं और हजारों किसान व खाताधारक इनसे जुड़े हैं। ऐसे व्यापक नेटवर्क के लिए केवल सात एटीएम का होना उस “डिजिटल विस्तार” की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है जिसका दावा प्रेसवार्ता में बार-बार किया जा रहा था।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई खाताधारकों को आज भी नकदी निकालने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई शाखाओं में एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है और जहां है भी, वहां नियमित रूप से तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में “प्रदेश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में प्रथम स्थान” का दावा सुनने वालों के लिए स्वाभाविक रूप से चौंकाने वाला था।
सभापति ने यह जरूर कहा कि आने वाले 3–4 महीनों में एटीएम की संख्या बढ़ाकर लगभग दो दर्जन करने की योजना है, लेकिन यह सवाल बना रहा कि जब बैंक वर्षों से विस्तार का दावा कर रहा है तो यह सुविधा अब तक क्यों नहीं बढ़ाई जा सकी।
नेट बैंकिंग में कमियां—फिर भी ‘डिजिटल ट्रांजैक्शन में प्रदेश में प्रथम स्थान’ का दावा
प्रेसवार्ता के दौरान यह भी स्वीकार किया गया कि बैंक की नेट बैंकिंग सेवाओं में अभी कई तकनीकी कमियां मौजूद हैं। कई खाताधारकों को ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग की पहुंच सीमित बनी हुई है।
इसके बावजूद डिजिटल ट्रांजैक्शन में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने का दावा किया गया। इस दावे ने उपस्थित पत्रकारों के बीच स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न खड़ा कर दिया कि क्या डिजिटल प्रगति का आकलन केवल आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है या सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता को भी इसमें शामिल किया गया है।
डिजिटल बैंकिंग की मजबूती केवल ट्रांजैक्शन की संख्या से नहीं बल्कि सेवाओं की स्थिरता, पहुंच और उपयोगकर्ता अनुभव से भी तय होती है। इस संदर्भ में कई सवाल अनुत्तरित ही रह गए।
सभागार की धूल भी बन गई ‘विकास मॉडल’ पर टिप्पणी
प्रेसवार्ता के दौरान एक प्रतीकात्मक दृश्य भी चर्चा का विषय बन गया। जिस सभागार में बैंक की उपलब्धियों के बड़े-बड़े आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे थे, उसी कक्ष की कुर्सियों और दीवारों पर धूल जमी दिखाई दी।
जब इस विषय में ध्यान दिलाया गया तो इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया जा सका। उपस्थित पत्रकारों के बीच यह टिप्पणी भी सुनाई दी कि यदि मुख्यालय के सभागार की यह स्थिति है तो दूरस्थ ग्रामीण शाखाओं की हालत का अनुमान लगाना कठिन नहीं है।
यह दृश्य कई लोगों के लिए केवल सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं था, बल्कि बैंक की व्यवस्थागत प्राथमिकताओं पर भी एक संकेत माना गया।
जर्जर शाखाओं में एसी लगाने का आश्वासन—क्या यही ‘हाईटेक बैंकिंग’ का मॉडल है?
सभापति ने यह जानकारी दी कि बैंक की कई जर्जर शाखाओं में सुधार कार्य कराया जा रहा है और वहां एसी लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसे आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
हालांकि पत्रकारों के बीच यह सवाल भी उठा कि क्या आधुनिक बैंकिंग का मतलब केवल भवनों में एसी लगाना है या फिर डिजिटल सेवाओं, शाखा विस्तार, तकनीकी सुधार और ग्राहक सुविधाओं को भी उसी प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाना चाहिए।
ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में आज भी कई शाखाएं आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में केवल एसी लगाने को “हाईटेक परिवर्तन” के रूप में प्रस्तुत करना कई लोगों को अधूरा प्रयास प्रतीत हुआ।
50 शाखाओं पर ही क्यों रुका विस्तार? इस सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं
जब पत्रकारों ने पूछा कि बैंक 31 करोड़ रुपये से अधिक लाभ का दावा कर रहा है, निजी पूंजी लगातार बढ़ रही है और कार्यशील पूंजी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, तो फिर शाखाओं की संख्या वर्षों से 50 पर ही क्यों स्थिर बनी हुई है—इस पर कोई स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। सहकारी समितियों की संख्या 115 होने के बावजूद शाखा विस्तार का अभाव बैंक की भविष्य की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है।
सवालों पर उखड़ा रवैया—प्रेसवार्ता का माहौल बदलता दिखा
प्रेसवार्ता के दौरान कई बार ऐसा भी लगा कि पत्रकारों के सीधे सवालों पर सभापति असहज हो गए। कुछ प्रश्नों के उत्तर घुमा-फिराकर दिए गए और कुछ महत्वपूर्ण सवालों को टालने की कोशिश भी दिखाई दी।
विशेष रूप से शाखा विस्तार, डिजिटल सुविधाओं की स्थिति और एटीएम संख्या से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। इससे प्रेसवार्ता का माहौल औपचारिक प्रस्तुति से हटकर जवाबदेही की चर्चा में बदलता नजर आया।
पूर्व सांसद संजीव बालियान का उल्लेख—लेकिन भविष्य की रणनीति अब भी अस्पष्ट
प्रेसवार्ता के दौरान Sanjeev Balyan के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बैंक की प्रगति में उनके योगदान की चर्चा की गई। हालांकि जब बैंक के दीर्घकालिक विस्तार की योजना, नई शाखाओं की स्थापना और डिजिटल नेटवर्क के वास्तविक विस्तार पर सवाल उठे तो कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया।
आंकड़ों की चमक और जमीनी सुविधाओं के बीच अभी भी लंबा अंतर
Muzaffarnagar District Cooperative Bank controversy के बीच यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि बैंक की वित्तीय उपलब्धियों के आंकड़े प्रभावशाली जरूर हैं, लेकिन शाखा विस्तार, एटीएम उपलब्धता, नेट बैंकिंग की स्थिरता और अधूरी योजनाओं की स्थिति जैसे मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ऐसे में “प्रदेश में नंबर-वन” का दावा जितना आकर्षक सुनाई देता है, उतना ही वह कई व्यावहारिक सवाल भी साथ लेकर आता है—जिनका जवाब भविष्य की कार्ययोजना से ही स्पष्ट हो सकेगा। बैंक की वित्तीय उपलब्धियों के आंकड़े प्रभावशाली जरूर हैं, लेकिन शाखा विस्तार, एटीएम सुविधाओं की उपलब्धता, डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और अधूरी योजनाओं जैसे मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
