Muzaffarnagar में निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित महंगी किताबों की बिक्री के विरोध में अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। शुक्रवार को भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा।

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों द्वारा बच्चों की किताबों को लेकर मनमानी की जा रही है, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की गई।


नए सत्र के साथ बढ़ता आर्थिक बोझ बना विरोध का कारण

हर वर्ष नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ अभिभावकों को बच्चों की नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस बार भी स्थिति अलग नहीं रही, लेकिन इस बार किताबों की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी ने विरोध को जन्म दिया।

अभिभावकों का कहना है कि कई निजी स्कूलों ने अपनी ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने की अनिवार्यता लागू कर दी है। इससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और उन्हें मजबूरी में महंगी किताबें खरीदनी पड़ती हैं।

इस स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


निर्धारित बुक स्टोर से ही खरीदने की मजबूरी पर उठे सवाल

प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा कुछ विशेष दुकानों को अधिकृत किया गया है, जहां से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। यदि कोई अभिभावक अन्य दुकानों से किताबें खरीदने की कोशिश करता है, तो कई बार अप्रत्यक्ष रूप से मना कर दिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि खुले बाजार में उपलब्ध वही किताबें निर्धारित दुकानों पर कई गुना अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि किताबों की बिक्री को लेकर सुनियोजित व्यवस्था बनाई गई है।


बाजार और स्कूलों द्वारा तय दुकानों के दामों में बड़ा अंतर

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने बताया कि बाजार में मिलने वाली किताबों की कीमत और स्कूल द्वारा तय दुकानों की कीमत में बड़ा अंतर देखा गया है। कई मामलों में एक ही किताब की कीमत दोगुनी या उससे अधिक बताई जा रही है।

अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था शिक्षा को सेवा के बजाय व्यापार में बदलने का संकेत देती है। उनका आरोप है कि किताबों के नाम पर अभिभावकों से अनावश्यक रकम वसूली जा रही है।


महंगाई के दौर में शिक्षा खर्च बना बड़ी चुनौती

विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने यह भी कहा कि पहले से ही बढ़ती महंगाई के कारण परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ना चिंता का विषय बन गया है।

उन्होंने बताया कि फीस, यूनिफॉर्म, परिवहन और अन्य शैक्षिक खर्चों के साथ किताबों की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। इससे कई परिवारों को बच्चों की शिक्षा जारी रखना कठिन लगने लगा है।


गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा असर

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस तरह की मनमानी का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। ऐसे परिवार पहले ही सीमित आय में बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि यदि किताबों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो कई परिवारों को बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकने जैसे कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं।


प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग तेज

Muzaffarnagar News private school books protest के दौरान अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूल किसी भी अभिभावक पर निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव न बनाएं।

ज्ञापन में दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।


भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) का मिला समर्थन

इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) ने सक्रिय भूमिका निभाई। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभिभावकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।


अभिभावकों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूरी में बच्चों को निजी स्कूलों से निकालने तक का निर्णय लेना पड़ सकता है।

अभिभावकों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि शिक्षा व्यवस्था को संतुलित और न्यायसंगत बनाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।


शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग हुई तेज

इस विरोध के बाद शहर में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने भी किताबों की कीमतों पर निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किताबों की बिक्री को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं तो अभिभावकों को राहत मिल सकती है और शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बन सकती है।


मुजफ्फरनगर में निजी स्कूलों की महंगी किताबों के खिलाफ उठी यह आवाज अब व्यापक जनचर्चा का विषय बनती जा रही है। अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई आर्थिक बोझ न बने और हर परिवार अपने बच्चों को बिना दबाव के बेहतर शिक्षा दिला सके।

 



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