Muzaffarnagar News मोरना ब्लॉक क्षेत्र के गांव छछरौली स्थित बैंक्वेट हॉल में ईंट निर्माता कल्याण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुजफ्फरनगर के जानसठ तहसील के भट्टा मालिकों ने बढ़ते व्यापारिक दबाव और समस्याओं पर चर्चा की। इसके अलावा, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और धार्मिक कट्टरता के मुद्दों पर भी खुलकर विचार-विमर्श किया गया।
भट्टा उद्योग की समस्याओं पर गहन चर्चा
बैठक में भाग लेने वाले भट्टा मालिकों ने सहारनपुर जिले की तुलना में अपने जिले में भट्टा संचालन पर लागू पाबंदियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनके भट्टों को केवल चार महीने तक चलाने की अनुमति है, लेकिन इसके बावजूद सहारनपुर के बराबर टैक्स वसूला जा रहा है।
बैठक के दौरान समिति अध्यक्ष प्रमोद बालियान ने व्यापारिक समस्याओं को सुलझाने और उद्योग की स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हमारे जिले में भट्टों पर लागू होने वाले नियमों में संतुलन की कमी है, जो व्यवसायियों के लिए अनुचित है।”
बांग्लादेश में अत्याचारों पर भारत सरकार से सख्त कदम की मांग
बैठक का केंद्र केवल व्यापारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। प्रमोद बालियान ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “भारत सरकार को बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ कड़ा संदेश देना चाहिए। धार्मिक कट्टरता के चलते मानवता शर्मसार हो रही है, और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।”
उनका मानना है कि पड़ोसी देशों में हो रहे इन अत्याचारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जानी चाहिए ताकि पीड़ित समुदाय को न्याय मिल सके।
बैठक में पदाधिकारियों और भट्टा मालिकों की सक्रिय भागीदारी
बैठक का संचालन महामंत्री बलराम तायल ने किया। इस दौरान भट्टा मालिकों ने समिति के पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। बैठक में मौजूद प्रमुख लोग थे:
- नवीन चेयरमैन
- जिला पंचायत सदस्य बबलू
- कृष्ण कुमार शर्मा
- मिंटू
- वरुण सिंघल
- आनंद
- साजिद
- जगत सिंह
- देवेंद्र सिंह
- सुरेश
- रविंदर
- नदीम जैदी
- राजीव राठी
- राजीव कंसल
- नौशाद
- बाबर जैदी
ईंट भट्टा उद्योग: स्थानीय समस्या से लेकर राष्ट्रीय महत्व तक
बैठक में केवल स्थानीय मुद्दे नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में भट्टा उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उठाया गया। वर्तमान में यह उद्योग न केवल पर्यावरणीय कारणों से बल्कि प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण भी दबाव में है।
समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बताया कि ईंट भट्टा व्यवसाय में रोजगार के बड़े अवसर हैं, लेकिन यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो यह उद्योग संकट में आ सकता है।
समस्या समाधान के लिए उठाए गए कदम
बैठक में यह तय किया गया कि जल्द ही एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। इसमें भट्टों के संचालन पर लागू पाबंदियों में सुधार और कर प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की जाएगी।
धार्मिक कट्टरता के बढ़ते खतरों पर चर्चा
बैठक में मौजूद सदस्यों ने सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए भारत सरकार से सख्त कार्रवाई की अपील की। प्रमोद बालियान ने कहा, “आज धार्मिक कट्टरता के कारण मानवता खतरे में है। हमें एकजुट होकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।”
ऐसी और बैठकों की जरूरत
बैठक के अंत में सभी ने यह सहमति व्यक्त की कि इस प्रकार की बैठकें नियमित रूप से आयोजित होनी चाहिए, ताकि उद्योग से जुड़े लोग अपने मुद्दे सीधे प्रशासन और सरकार तक पहुंचा सकें।
निष्कर्ष: सामूहिक प्रयास ही समाधान का रास्ता
मोरना में आयोजित यह बैठक स्थानीय उद्योग के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुई। भट्टा मालिकों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं को जल्द ही हल किया जाएगा।
