अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। नगर निगम की बेशकीमती नजूल भूमि को संपत्ति विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत करके ठिकाने लगाने का खेल चल रहा है। पिछले दिनों दो मामले ऐसे उजागर हुए, जिसमें जमीन कारोबारियों ने मिलीभगत करके सरकारी जमीन की एनओसी हासिल कर ली।

इनमें एक एनओसी हासिल करने में आराजी तक बदल दी गई। इस फर्जीवाड़ा के उजागर होने पर एनओसी निरस्त कर दी गई। अब इस तरह के अन्य मामलों की पड़ताल समेत निगम कर्मचारियों की भूमिका भी तलाशी जा रही है।

नगर निगम की भगवंतपुरा, गरियागांव, बिजौली, मैरी समेत कई जगह की बेशकीमती नजूल जमीन पर भूमाफिया की निगाह है। बड़े पैमाने पर आराजी नंबर बदलकर भू-माफिया ने कई एकड़ जमीन अपने नाम करा ली है। अब निगम प्रशासन ने इन जमीनों की सुध लेनी शुरू की तब जमीन घोटालों की परतें खुलकर सामने आने लगीं।

कई साल से संपत्ति विभाग में जमे कर्मचारियों ने सरकारी कागजों से छेड़छाड़ करके सरकारी आराजी बदलकर जमीन भूमाफिया के हवाले कर दी। गोविंद चौराहे में आराजी बदलने का खेल उजागर होने के बाद निगम प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराया।

वहीं, अंदर उनाव गेट पुलिस चौकी के पास मीरा देवी के पक्ष में 750 वर्गफीट जमीन की एनओसी जारी कर दी गई जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन नगर निगम के नाम दर्ज है। इसके बावजूद एनओसी जारी कर दी गई।

इसी तरह डडियापुरा में आराजी संख्या 1438 पर फर्जीवाड़ा करके एनओसी जारी कर दी गई। जांच पड़ताल में मालूम चला कि जिस आराजी संख्या के आधार पर एनओसी जारी की गई वह इस जुज भाग में नहीं है। सहायक नगर आयुक्त अबुल कलाम के मुताबिक मामले की पड़ताल कराई जा रही है।



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