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– फोटो : फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश के आगरा में पीड़ित से तहरीर लेने के बाद केस में धाराएं लगाने का काम थाने के मुंशी अब ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से करा रहे हैं। कमिश्नरेट के पश्चिमी जोन के थानों में एक महीने से किया जा रहा यह प्रयोग सफल रहा है। भारतीय दंड संहिता और बीएनएस की नई धाराओं में माथापच्ची भी नहीं करनी पड़ रही।
डीसीपी पश्चिमी जोन सोनम कुमार ने अपनी टीम के साथ बीटा एप बनाया है। एक महीने से इस पर काम किया जा रहा था। इस दौरान कई तहरीर ऐसी आईं जिनमें किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए, इसे लेकर माथापच्ची करनी पड़ी। थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों ने एआई की मदद ली। उससे पूछा गया कि तहरीर के आधार पर कौन-कौन सी धाराएं लगनी चाहिए। अधिकांश मामलों में एआई ने सटीक जानकारी दी।
डीसीपी ने बताया एक महीने से जारी इस प्रयोग के परिणाम सकारात्मक आए हैं। अब एआई की मदद का कमिश्नरेट के अन्य जोन में भी प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि सभी तहरीर में ऐसा नहीं हो रहा। जिनमें जरूरत समझी जा रही, उसी में एआई की मदद ली जा रही है। साथ ही एआई की ओर से बताई गई धाराओं का मिलान थाने पर मौजूद आईपीसी व बीएनएस की किताबों से भी किया जा रहा। इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों से भी निर्देश लिए जाएंगे।
बन रहा आईआईटी सेल
पुलिस आयुक्त कार्यालय में अब तक सिर्फ सर्विलांस सेल होता था। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड के कैंप कार्यालय में अब इनोवेशन एंड इंफार्मेशन टेक्नोलाॅजी सेल बनाया जा रहा है। यह सेल पूरी तरह से एआई से लैस होगा। इसे आधुनिक बनाने के लिए हर सप्ताह बैठक होती है। इसमें सुधार के बिंदुओं पर चर्चा की जाती है।
