तंग हाल में जिंदगी फिर भी हौंसले बुलंद
झांसी। एलएलएम में कुलाधिपति रजत पदक प्राप्त करने वाली अनुप्रिया करपात्री के बुलंद हौंसले तंगहाली के बावजूद अडिग है। वह जज बनना चाहती है, जिसके चलते लगातार प्रयारसत है।
अनुप्रिया ने बताया कि जब उसका जन्म हुआ, तब पिता ने मां को छोड़ दिया। मां उसे गोद में लेकर कैमासन नगर स्थित मायके आ गई। नाना पेट्रोल पंप पर काम करते थे, जिसकी वजह से भरण-पोषण में दिक्कत आई। कुछ समय बाद नाना का निधन हो गया तो जिंदगी जीने का सहारा मामा बने। वह बताती हैं कि मामा एंबुलेंस चालक हैं और तंगी साथ नहीं छोड़ रही। अनुप्रिया का कहना है कि उसकी जिंदगी का लक्ष्य जज बनना है, जिसके लिए लगातार तैयारी कर रही है। एलएलएम में रजत पदक मिलने का काफी खुशी हुई है और अब लक्ष्य पाने का प्रयास है।
इनका हुआ लोकार्पण व शिलान्यास
झांसी। कुलाधिपति ने फिजियोथैरेपी बिल्डिंग के एक्सटेंशन का लोकार्पण किया। इसके बाद सेंट्रलाइज्ड डिजिटल रिसर्च एंड एप्लीकेशन सेंटर, मल्टी डिसिप्लेनरी सेंटर एंड बिजनेस इन्नोवेशन पार्क, सेंटर ऑफ बुंदेलखंड हेरीटेड आर्ट्स, कल्चर एंड वूमेन एक्टिविटी सेंटर, सेंटर फॉर मिलेट्स रिसर्च एंड प्रोडेक्शन, सेंटर फॉर रिसर्च एंड साइंटिफिक एक्सीलेंस एंड रिसर्च एंड डेवलेप सेटंर फॉर सब्सेटेनेबिल एंड रिनोवल एनर्जी, वर्सटाइल स्पोर्ट्स ग्राउंड का शिलान्यास किया।
