अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। पहूज नदी की बदहाली को लेकर दाखिल किया गया वाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में स्वीकार कर लिया गया है। शुक्रवार को इस मामले की पहली सुनवाई भी हुई, जिसमें वादी अधिवक्ता ने एनजीटी के समक्ष अपना पक्ष रखा।

जीवनदायिनी पहूज नदी के पुनरुद्धार के लिए अमर उजाला की ओर से लगातार मुहिम चलाई जा रही है। इससे प्रेरित होकर बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष अधिवक्ता भानु सहाय की ओर से एनजीटी में वाद दाखिल किया गया था, जिसे शुक्रवार को स्वीकार कर लिया गया। एनजीटी में वादी अधिवक्ता का ऑनलाइन पक्ष भी सुना गया, जिसमें उन्होंने बताया कि पहूज नदी के पानी का उपयोग पीने और सिंचाई के लिए किया जाता है। बावजूद, नदी में चार नालों का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे यह नदी कहीं-कहीं तो गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। पानी काला हो चुका है और उसमें बदबू आती है। नदी का मूल स्वरूप बिगड़ चुका है। इसका संरक्षण नहीं किया गया तो यह जीवनदायिनी नदी इतिहास के पन्नों में गुम हो जाएगी।

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नदी के दोनों किनारों पर आज होगा पौधरोपण

पहूज नदी के पुनरुद्धार के लिए सामाजिक संस्था परमार्थ भी आगे आई है। संस्था की ओर से गांव-गांव में चौपाल आयोजित की जा रही है और जागरूकता रैलियां निकाली जा रही हैं। इसका खासा असर भी देखने को मिल रहा है। संस्था के स्वयंसेवियों के साथ ग्रामीण भी नदी की सफाई के लिए आगे आ रहे हैं। इस काम में महिलाओं की भी खासी भागीदारी है। अब संस्था परमार्थ शनिवार से नदी के दोनों किनारों पर पौधरोपण की शुरुआत करेगी। पहले दिन ग्राम बैदोरा में 400 जामुन और 100 अर्जुन के पौधे रोपे जाएंगे। पौधरोपण सुबह नौ बजे से होगा।



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