Nine-day long Maha Yagya concluded at Falahari Baba Ashram saints gathered

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पहुंचे संत
– फोटो : Amar Ujala

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फलाहारी बाबा आश्रम के मंहत रामदास त्यागी एवं आयोजक विनोद कुमार दूबे के सहयोग से लगातार नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान कराया गया। मंहत रामदास त्यागी ने बताया कि हवन यज्ञ से वातावरण व वायुमंडल शुद्ध होने के साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ से व्यक्ति भव सागर पार हो जाता है। श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ से जीव में भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। धार्मिक आयोजनों से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।

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उन्होने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला जवाब प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। उसे हम सब प्रसाद कहते हैं। प्रसाद हर धार्मिक आयोजन या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन, बुद्धि व चित्त को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी ‘भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है।



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