
नहर में पानी नहीं
अमेठी सिटी। जिले में नहरों का जाल बिछा है। एक बड़ा हिस्सा खेती के लिए नहरों के पानी पर आश्रित है। वर्तमान में रखरखाव के चलते अधिकांश नहरों, माइनरों में पानी नहीं हैं। जायद फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
अनुरक्षण कार्य के चलते नहरें सूखी हैं, खेत प्यासे हैं और किसान परेशान हैं। किसानों के सामने जायज फसलों की सिंचाई करने की बड़ी चुनौती है। धान की बेहन (पौध) तैयार करना चुनौती है। किसान निजी व सरकारी नलकूपों पर ही आश्रित होने के मजबूर हैं। कई ऐसे किसान हैं, जिनकी खेती पूरी तरह नहरों के पानी पर आश्रित है। किसानों के सामने करो-मरो की स्थिति बनी हुई है।
जिले में 7554 हेक्टयर में किसानों की चरी, उड़द, मूंग और सब्जियों की फसल खड़ी है। मई की तपती दोपहरी में फसलों को सिंचाई के लिए पानी की सख्त जरूरत है। जिले से गुजरने वाली नहर व रजबहा इन दिनों सूखे पड़े हैं। बारिश का अभाव, बेतहाशा बिजली कटौती से निजी नलकूपों से सिंचाई की व्यवस्था भी काम नहीं कर रही है। राजकीय नलकूप भी खराब है। कई किसान तो रबी की फसल कटने के बाद हरी खाद के लिए ढ़ैचा सहित अन्य फसलों की बोआई करते है, लेकिन फसल बोने के लिए नहर में पानी का इंतजार कर रहे हैं।
सिंहपुर ब्लॉक में प्रभावित हो रहे 50 हजार किसान
सिंहपुर। क्षेत्र के रजबहा में करीब एक माह से पानी नदारद होने से क्षेत्र के लगभग 50 हजार किसानों की खेती प्रभावित है। सिंहपुर रजबहा से निकली माइनरों में सिंहपुर क्षेत्र में लगभग 24 माइनर हैं। लौली, खरांवा, जगतपुर, सातनपुरवा, बंगरा, शिवरतंगज, जेहटाउसरहा, खरकपुर, पड़रिया, पेन्डारा, खारा, भानीपुर, भवानीपुर, बतिया, जिजौली, आजादपुर, पंहौना, सिंहपुर, गोधना, फत्तेपुर, रस्तामऊ, कोची, गोड़वा, राजापुर है। इन माइनरों से क्षेत्र के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करती है।
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क्या कहते हैं किसान
नहर व माइनरों के भरोसे खेती करने वाले किसानों के समक्ष बड़ा संकट है। उड़द व मेंथा की सिंचाई करने के लिए किसान परेशान हैं। धान की नर्सरी डालने में देरी हो रही है। इसको लेकर क्षेत्रीय किसान अरविंद, राजबहादुर, बब्बन, रज्जन तिवारी, विजय शंकर आदि ने बताया कि यदि धान नर्सरी समय पर नहीं डाली गयी तो धान की पैदावार प्रभावित होगी। इसका प्रतिकूल प्रभाव उपज पर पड़ेगा।
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इन फसलों की हुई है बोआई
फसल का नाम – बोआई का रकबा
मक्का – 340 हेक्टेयर
उूर्द – 2344 हेक्टेयर
मूंग – 744 हेक्टेयर
सूरजमुखी – 95 हेक्टेयर
सब्जियां – 2976 हेक्टेयर
हरा चारा – 1025 हेक्टेयर
जिले में 1.21 लाख हेक्टेयर में होती है धान की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की प्रमुख फसलों में शामिल धान की खेती में जिले में 1,21,138 हेक्टेयर भूमि पर होती है। 15 जून से धान रोपाई का काम शुरू होता है जो 15 जुलाई तक चलेगा है। करीब एक माह पहले किसान धान की बेहन (पौध) तैयार करने की कोशिश में जुटे है। धान की बेहन भी 383.33 हेक्टयर में तैयार होती है। 15 मई से किसान धान की बेहन डालने की कोशिश में जुटे है।
इनसेटजिले से गुजरती है करीब 300 नहरें
छोटी-बड़ी करीब तीन सौ नहरों का जाल बिछा है। यहां छह शारदा सहायक खंडों से नहरों से जिले के किसानों को फसल सिंचाई की व्यवस्था बनाई गई है। शारदा सहायक खंड-41 अमेठी, खंड 51 प्रतापगढ़, खंड हैदरगढ़, खंड 49 सुल्तानपुर तथा खंड 45 रायबरेली की नहरें जिले के अलग-अलग भागों से गुजरती है।
अनुरक्षण कार्य के लिए बंद है पानी की आपूर्ति
अनुरक्षण कार्य के लिए वार्षिक बंदी के तहत मुख्य एवं पोषक नहर हेड़ से बंद है। नौ जून से मुख्य एवं पोषक नहर हेड़ से पानी की आपूर्ति शुरू होगी। जिसके बाद रोस्टर के अनुसार सभी नहरों व माइनरों में टेल तक पानी पहुंचाया जाएग।
रमाशंकर राय, एक्सईएन