...Now the review of election results started on the kiosks.

चाय की दुकान पर चर्चा करते हुए

अमेठी सिटी। अमेठी के लोग खुद पर और खुद के फैसलों पर यूं ही गर्व नहीं करते। अमेठी का मतलब ही है अभिमान, गर्व । फैसले चाहे निजी जिंदगी के हों, या सियासत के। यहां के लोग हर फैसला सोंच, समझ, तर्क-वितर्क के बाद ही करते हैं। मंगलवार को अमेठी लोकसभा चुनाव का आया परिणाम भी इसी फैसले का नतीजा माना जा रहा है। चुनाव के इन परिणामों को लेकर यहां की अवाम में क्या चर्चा है, जानने की कोशिश की तो लोगों की जुबां से रोमांचित करने वाली प्रतिक्रिया सुनने को मिली।

5 जून की दोपहर के 12:10 बजे थे। गौरीगंज रेलवे स्टेशन के पास रामू द्विवेदी की चाय की दुकान गुलजार थी। कई लोग कुर्सियां डाले दुकान के बाहर पेड़ के नीचे बैठे चाय पी रहे थे तो कई वरिष्ठजन दुकान में चाय की चुस्कियों के साथ आए चुनावी परिणाम पर चर्चा में मशगूल थे। चुनावी चर्चा सुन हम भी उस बैठकी में शामिल हो गए। कुछ देर उनकी बातें सुनीं।

चुनावी चर्चा में शामिल रामचंद्र तिवारी कुछ देर अपना मोबाइल देखने के बाद बोले, का नितीशवा…फिर पल्टी मारी…बा…का हो… इस पर वहां बैठे अन्य लोग हंस पड़े। इस पर रामसजीवन मिश्रा बोले या राजनीति हवै… कुछहू हुई सकत बा…। पेशे से बड़े किसान पंकज पांडेय ने सबकी बात काटते हुए कहा कि इनका अहंकार लै डूबा हई..। इस बीच गिरिजा शंकर मिश्रा कहने लगे अबकी खूब भितरघात भा है। उनहिन के कुछ लोग अबकी साथ नाई दिहीन… एैसन मामला थोरै गड़बड़ान…।

इन चर्चा के बीच चुनावी माहौल को लेकर सभी से बात की, तो वहां मौजूद किसान गंगा सागर पांडेय ने भी खुल कर बताया कि किन वजहों से अमेठी के परिणाम बदल गए हैं। चर्चा में बैठे लोग कई ऐसे कारण बता गए जो वास्तव में अमेठी में बदली राजनीति की वजह बने हैं।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

चाय की चुस्कियों के साथ शहर में कई जगह चुनावी चर्चाएं होती रहीं। इन चर्चाओं में लोगों ने अपनों के बीच खुलकर उन वजहों पर चर्चा की, जिन वजहों से चुनाव के नतीजे बदले हैं।

चर्चाओं में लोगों से सुना गया कि जिले के दो सपा विधायक भले ही भाजपा के पाले में आ गए हों, लेकिन वह वोट नहीं ला पाए, उल्टे उनके आने से भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता नाराज हो गए। कुछ लोगों ने भितरघात भी की। महंगाई, बेसहारा पशुओं से फसलों को नुकसान, महंगी पढ़ाई, शिक्षकों से जुड़े मामले, अग्निवीर, पेपर लीक आदि के मामले छाए रहे। सरकार में बैठे कुछ नेताओं के बयानों व कार्रवाईयों से नाराजगी और जातीय गोलबंदी भी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में हवा बनाने का काम किया।

सोशल मीडिया पर छाईं नाराजगी की पोस्टें

अमेठी में चुनाव परिणाम आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोग खूब प्रक्रियाएं दे रहे हैं। एक चाय की दुकान पर चुनाव की चर्चा करते हुए लोगों सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाओं को पढ़ कर मजे लेते देखे गए। मोबाइल पर एक फेसबुक एकाउंट होल्डर की पोस्ट देख कर एक जागरूक नागरिक मजे ले रहे थे। उन्होंने पोस्ट दिखाई तो उसमें लिखा था…छल कपट का खेल तुम्हें मुबारक, हम सीधे साधे नाता तोड़ लेते हैं …। यह पोस्ट पढ़ कर सुनाने के बाद वह बोले, अब सोशल मीडिया पर लोग ऐसी बातें डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोस्ट डालने वाले यह शख्स बड़ी पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं।



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