फर्नीचर कारोबारी आने वाले समय में शीशम, सागौन की बताकर आम की बनी लकड़ी का फर्नीचर नहीं बेच पाएंगे। चीन के घटिया फर्नीचर पर भी अंकुश लगेगा। फर्नीचर पर भी अब आईएसआई चिह्न होगा। 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। शहर में फर्नीचर का कारोबार सालाना 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। फर्नीचर बनाने वाले कारोबारियों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से लाइसेंस लेना होगा।
कारोबारियों का कहना है कि आईएसआई चिह्न लगने से फर्नीचर की गुणवत्ता बढ़ेगी। चीन का घटिया फर्नीचर बाजार से हट सकेगा। फर्नीचर बाजार में चीन की पैठ 50 प्रतिशत से ज्यादा है। शहर के गोविंदनगर, जवाहरनगर, अशोकनगर, पीरोड, निरालानगर, हीरागंज, लालबंगला, किदवईनगर समेत शहर में पांच हजार से ज्यादा फर्नीचर की दुकानें और 250 से ज्यादा शोरूम हैं। ब्रांडेड कंपनियों के भी शोरूम खुल गए हैं। फिलहाल प्लाई व सनमाइका पर ही आईएसआई का चिह्न लगता है।
