
Infertility
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश भर में हर आठ जोड़े में से एक में बांझपन की समस्या है। बच्चा न पैदा होने की समस्या में केवल महिलाएं जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि 40 फीसदी पुरुषों में भी समस्याएं हैं। बांझपन की समस्या देश में 22 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इलाज के लिए सेंटर भी पर्याप्त नहीं हैं।
शुक्रवार को नदेसर स्थित एक होटल में स्त्री रोग व गर्भधारण में आ रही समस्याओं पर आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में इंडियन सोसाइटी ऑफ अस्सिटेंड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर) के अध्यक्ष और मुंबई के बांझपन रोग के विशेष डॉ. अमित पटकी ने बताया कि बांझपन के तमाम कारण हैं।
अनियंत्रित जीवनशैली और जंक फूड मुख्य वजह है। यह स्थिति पुरुषों में भी है। इसलिए उनके शुक्राणु कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में बच्चा पैदा नहीं हो पाते हैं। उनकी भी जांच जरूरी हो गई है। देशभर में समस्या जिस तेजी से बढ़ रही है। उसके मुकाबले यहां मात्र 3000 ही आईवीएफ सेंटर और 4000 डॉक्टर हैं। हालांकि मुंबई के तीन मेडिकल कॉलेजों में सेंटर खोले गए हैं।
कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मणिपाल (कर्नाटक) के प्रो. सतीश कुमार अडिगा ने बताया कि 20 फीसदी बांझपन की समस्या महिला व पुरुष दोनों में हैं। 35 व 45 साल में शादी करने और जीवनशैली में बदलाव से पुरुषों में जहां शुक्राणु कमजोर हो रहे हैं। महिलाओं में करीब ढाई लाख अंडाणुओं की संख्या घट रही है।
ये हैं कारण
बांझपन की समस्या तले भुने खाने की मात्रा अधिक होने, देर रात में सोने, शादी देर से करने, तनाव, नशे का सेवन, गर्भ निरोधक दवाओं के सेवन, मोटापा, मधुमेह से होती है।
35 साल के पहले कर लें बच्चा पैदा
डॉ. अमित पटकी ने बताया कि जीवन शैली बदलें, पौष्टिक आहार लें और 35 साल के पहले शादी कर बच्चे पैदा कर लें। 50 साल की उम्र में बच्चा पैदा करने से बच्चे में भी बांझपन जेनेटिक होने का डर बन रहा है। 40 साल के बाद बांझपन की समस्या ज्यादा होती है।
