संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 20 Aug 2024 01:29 AM IST

कासगंज। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के श्रमिकों को गांव में ही रोजगार के अवसर देने के लिए मनरेगा योजना के तहत 100 दिन की गारंटी भले ही दी गई हो लेकिन हकीकत इसके उलट है। मजदूरों को रोजगार के लिए तरसना पड़ता है। इसकी हकीकत खुद आंकडे बयां कर रहे है। रोजगार के अवसर लगातार घट रहे है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 के 135 दिन में मात्र तीन परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका है।राष्ट्रीय ग्रामीण मनरेगा रोजगार गारंटी योजना अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिकों को रोजगार देने के लिए यह योजना संचालित है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में जॉब कार्ड धारक परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया जाता है । गांव में तालाब,चकमार्ग, सड़क,बांध,खेतों का समतलीकरण,बंबा की खुदाई,कुंआ निर्माण कार्य के लिए जॉब कार्ड धारक श्रमिकों से कार्य कराया जाता है। गांव के श्रमिकों के शहर में पलायन को रोकने के लिए सरकार उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराती है। रोजगार के लिए मनरेगा योजना में रोजगार के नाम पर लगातार धनराशि खर्च की जाती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में योजना पर 17,57,68,206 रुपये खर्च हो चुके है।इस धन राशि से 741638 मानव दिवस सृजित किए गए है। लेकिन 100 के रोजगार देने के नाम पर खाना पूर्ति हो रही है। ग्राम प्रधान,सचिव,रोजगार सेवक आदि की मेहरबानी पर ही मजदूरों को रोजगार मिल पाता है।लेकिन मजूदरों को रोजगार नही मिल पाता है। ऐसे में परिवार का भरण पोषण करने के लिए तमाम श्रमिक शहर में पलायन करने को मजबूर हो जाते है।
