इटावा। दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी को प्रताड़ित करने और घर से निकालने वाले पति को सत्र न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पीड़ित पत्नी अनीता के पक्ष में निर्णय दिया है। इसके तहत पति को प्रतिमाह भरण-पोषण और मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक दंड देना होगा।

पति का क्रूर व्यवहार 2003 में अनीता का विवाह अरुण कुमार के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने बाइक और 50,000 रुपये की मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर अनीता को भूखा रखा गया और उसके पति ने एक रात मिट्टी का तेल डालकर उसे जलाने का भी प्रयास किया था। पड़ोसियों की तत्परता से उसकी जान बच सकी थी। इसके बाद वह मायके चली गई थी।

घर से निकाला, अब देना होगा हर्जाना साल 2010 में पति ने अनीता को यह विश्वास दिलाकर घर वापस बुलाया कि अब उसे परेशान नहीं किया जाएगा। लेकिन वहां पहुंचते ही उसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। इनकार करने पर उसे धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया गया था। सत्र न्यायालय ने इस मामले में कहा कि बिना किसी वाजिब कारण के पत्नी को घर से निकालना और उसका भरण-पोषण न करना स्पष्ट रूप से घरेलू हिंसा है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पति अपनी आय न होने का बहाना बनाकर अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने पति को प्रतिमाह 2,000 रुपये भरण-पोषण तथा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बदले 20,000 रुपये की एकमुश्त राशि देने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, पूर्व में तय किए गए अन्य खर्चों के भुगतान का भी निर्देश दिया गया है।



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