अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। नामांतरण शुल्क को लेकर हो रहे विरोध ने सिकमी किराएदारों के लिए शुरू हुई एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को धड़ाम कर दिया। आवेदन की समयावधि खत्म होने तक महज 15 दुकानदार ही पैसा जमा करने पहुंचे जबकि करीब 250 सिकमी दुकानदार निगम की दुकानों पर काबिज हैं। अब निगम प्रशासन दोबारा से समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी में है।

नगर निगम की इलाइट चौराहा, मछली-मुर्गा मंडी, सुभाष गंज समेत विभिन्न स्थानों पर 1200 से अधिक दुकानें हैं। दशकों पहले निगम प्रशासन ने नाममात्र किराए पर यह दुकानें आवंटित कर दी थी। निगम को नाममात्र किराया चुकाकर तमाम आवंटियों ने इसे सिकमी को थमा दी और उनसे मोटा किराया वसूल रहे हैं। इन सिकमी दुकानदारों की संख्या करीब 250 है। अब निगम प्रशासन अब इनको ही मूल आवंटी बनाना चाह रहा है लेकिन, इसके एवज में लगने वाले नामांतरण शुल्क को ज्यादा बताते हुए दुकानदार विरोध कर रहे हैं। विरोध के चलते काफी कम संख्या में दुकानदार खुद को नियमित कराने आगे आए। पिछले दिनों समय-सीमा खत्म होने तक महज 15 दुकानदारों ने पैसा जमा किया जबकि आठ दुकानदारों के आवेदन विचाराधीन हैं। वहीं, नगर निगम अफसरों का कहना है कि दोबारा से इनकी समय-सीमा बढ़ाई जाएगी।



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