{“_id”:”6738ff477577caee770e38e4″,”slug”:”out-of-522-cylinders-installed-in-the-medical-college-100-are-expired-orai-news-c-12-knp1009-900671-2024-11-17″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Jalaun News: मेडिकल कॉलेज में लगे 522 सिलिंडरों में से सौ एक्सपायर्ड”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
उरई। झांसी मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे के बाद भी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग सबक नहीं ले रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में जगह-जगह बिजली का केबल लटकते मिले। फायर सेफ्टी संबंधी इंतजाम भी ठीक नहीं मिले। कई फायर सिलिंडर एक्सपायरी डेट के मिले। यही हाल जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का रहा।
जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) और महिला अस्पताल में संचालित सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के बाहर भी केबल लटको मिले। तीनों अस्पतालों के चिकित्सा प्रमुखों ने दावा किया कि कार्यदायी संस्था को समस्या दूर करने के लिए निर्देशित किया है। यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
सुबह 11.42 बजे जब अमर उजाला की टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर पड़ताल की तो जगह-जगह खामियां नजर आईं। सामान्य इमरजेंसी वार्ड हो या फिर बच्चों वाला इमरजेंसी वार्ड, सभी जगहों पर केबल लटकते मिले। इमरजेंसी में फॉल्स सीलिंग लटक रही थीं। बाल रोग की इमरजेंसी में फायर सेफ्टी की पाइप लाइन के बॉक्स को कूड़ादान बना दिया है। यहां कई जगह एक्सपायरी सिलिंडर भी मिले। कई जगह फायर अलार्म ने काम नहीं किया।
जब टीम पड़ताल कर रही थी, उसी वक्त अग्निशमन अधिकारी चंद्रशेखर यादव अपनी टीम के साथ पहुंच गए। टीम ने भी जांच पड़ताल की। प्राचार्य कक्ष के बाहर लगे फायर अलार्म को चलाकर देखा तो उसने काम नहीं किया और वह लाल सिग्नल देने लगा। मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि यह काम नहीं कर रहा है। धूल या किसी वजह से खराब हो गया है।
साथ ही यह भी कहा कि यहां की फायर सेफ्टी का मेंटीनेंस हर दो तीन महीने में होता है, लेकिन इस बार नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया है। बाल रोग विभाग में कहीं भी फायर सेफ्टी के नंबर नहीं लिखे थे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और 112 समेत अग्निशमन के कंट्रोल के नंबर भी जगह-जगह प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।
मेडिकल कॉलेज की पहली मंजिल पर पुराने कोरोना वार्ड के बाहर जो भी फायर सिलिंडर लगे थे, उसमें अधिकांश की एक्सपायरी डेट सितंबर 2023 थीं। मेडिकल कॉलेज में कुल 522 आग बुझाने वाले सिलिंडर हैं, इसमें करीब सौ एक्सपायरी वाले सिलिंडर मिले। पड़ताल के दौरान कई जगह केबल लटकती और बॉक्स खुले मिले। 12.45 बजे कर्मचारी बिजली के बोर्ड की केबल ठीक करते नजर आए। कर्मचारियों ने बताया कि पूरे मेडिकल के सभी बोर्डों की जांच करने का आदेश मिला है। प्रभारी सीएमएस डॉ. चरक सागवान का कहना है कि बिजली विभाग की टीम को कहा गया है, जो भी कमियां है, उसे ठीक किया जाए। अग्निशमन विभाग के साथ जांच की गई है, जो निर्देश मिले है, उसे पूरा किया जाएगा।
हादसे के बाद चेता, ठेकेदार को दिया नोटिस
जिला अस्पताल में 2.51 बजे की गई पड़ताल में भी जगह-जगह केबल लटकता मिला। कई जगह बिजली के बोेर्ड खुले मिले। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के बाहर बिजली का केबल लटक रहा था। एनआरसी में 13 बच्चे भर्ती बताए गए लेकिन मौके पर छह ही बच्चे मौजूद मिले। यहां के कर्मचारी बिजली ठेकेदार की कार्यशैली से नाराज दिखे। बताया कि कई बार ठेकेदार को सचेत किया जा चुका है लेकिन उसकी कार्यशैली में सुधार नहीं हो रहा है। सीएमएस डॉ. जगजीवन राम ने बताया कि सुबह जिला अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। जगह जगह बिजली व्यवस्था ठीक नहीं मिली। इस पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर व्यवस्था तत्काल दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं।
महिला अस्पताल में भी दिखी लापरवाही
दोपहर 3.12 बजे जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में बड़ी लापरवाही सामने आई। वार्ड के मुख्य द्वार पर बिजली की केबल लटक रहा था। साथ ही बॉक्स खुले पड़े थे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. कुद्दूस भी गायब थे। बताया गया कि नीचे ओटी में गए हैं। थोड़ी देर बाद आए तो कहने लगे कि जो भी कमियां है, उसे लिखित में अवगत करा दिया गया है। क्या कमियां है, वह नहीं बता पाए। एसएनसीयू वार्ड के नीचे परिसर में पिछले दिनों आगजनी की घटना भी हो चुकी है। उस वक्त खलबली मच गई थी। वार्ड को खाली करना पड़ा था, हालांकि कोई अनहोनी नहीं हुई थी। जिस जगह आगजनी की घटना हुई थी, उस जगह पर आज भी लापरवाही देखने को मिली। वहां आज भी खुला बॉक्स पड़ा था और आगजनी से जली दीवारें काली पड़ी थीं। सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा ने बताया कि उन्होंने भी ठेकेदार के साथ निरीक्षण किया था। जो भी कमियां मिली, उसे ठेकेदार को बता दिया गया है।
