Panchayat of Kisan Union in Lucknow.

भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत।
– फोटो : amar ujala

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भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर रविवार को ईको गार्डेन में पंचायत का आयोजन किया गया। यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में किसानों के हक के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया गया। किसानों ने कहा कि सरकार ने मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी, लेकिन अब बकाया वसूलने के लिए हथकंडा अपना रही है।

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टिकैत ने कहा कि किसानों के मसीहा महेंद्र सिंह ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे हर हाल में निभाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित 40 सूत्रीय ज्ञापन दिया गया। इसमें गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, चीनी मिलों की ओर से किसानों का बकाया भुगतान करने, आवारा पशुओं से फसल को बचाने, किसान साधन सहकारी समितियों पर खाद बीज की उपलब्धता बरकरार रखने, फसल बीमा का जल्द से जल्द भुगतान करने जैसी मांगें उठाई गईं।

अधिकारियों के साथ बैठक में कई मुद्दों पर सहमति

किसान यूनियन के प्रतिनिधियों की शाम को मंडी परिषद में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ वार्ता हुई। इसमें किसानों ने सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली का मुद्दा उठाया। कहा- पावर कॉरपोरेशन द्वारा उत्तर प्रदेश नियामक आयोग को बढ़ी हुई दरों पर विद्युत संयोजन व बिजली के रेट के प्रस्ताव को तत्काल खारिज किया जाए। इस पर विभागीय अधिकारियों ने बात करने का आश्वासन दिया। इसी तरह जमीन अधिग्रहण पर मुआवजा वितरण के लिए डीएम को जिम्मा देने की मांग की गई। इस पर अधिकारियों ने सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। किसानों ने मांग की कि प्रदेश में भूमि अधिग्रहण में ली गई जमीनों का बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा किसानों को दिया जाए। किसानों ने प्रदेश में चल रहे गन्ना समिति के चुनाव में बहुत से जिलों में गलत तरीके से प्रत्याशियों को चुनाव जिताने का आरोप लगाया। इसकी भी जांच करने की मांग की गई।

हरियाणा में किसानों ने बदला ले लिया : राकेश टिकैत

ईको गार्डेन में मीडिया से बातचीत में किसान नेता राकेश टिकैत ने हरियाणा चुनाव के रुझानों पर कहा कि जो भी सरकार किसानों पर लाठी चलाएगी तो वह जाएगी ही। हरियाणा में किसानों ने बदला ले लिया है। टिकैत ने कहा कि किसानों की जमीन पर खतरा मंडरा रहा है। सर्किल रेट नहीं बढ़ रहा है। लखनऊ से तो कह दिया जाता है कि भुगतान हो गया, लेकिन धरातल पर सच कुछ और ही है।



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