
मालवीय जयंती के उपलक्ष में मालवीय भवन की हुई सजावट।
– फोटो : रोहित
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बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय के तीसरे कुलपति थे। उन्होंने करीब 20 साल तक कुलपति के रूप में अपनी सेवा दी। इसके बाद उन्होंने सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को कुलपति का पद संभालने की सिफारिश की। शुरुआत में तो वह नहीं माने लेकिन बाद में उन्होंने अपनी सहमति दी। इसके तुरंत बाद महामना ने अपना त्याग पत्र तत्कालीन विश्वविद्यालय के परिषद को भेज दिया।
महामना वर्ष 1939 में जब कोलकाता गए थे तो उन्होंने प्रो. राधाकृष्णन को उन्हीं शर्तों के आधार पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय का कुलपति पद ग्रहण करने को कहा, उस समय वह कलकत्ता विश्वविद्यालय में कार्यरत थे। शुरुआत में राधाकृष्णन ने वेतन के आधार पर कुलपति का पद ग्रहण करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने महामना से बातचीत में ऑक्सफोर्ड एवं कोलकाता में व्यस्तता का हवाला देते हुए कुलपति का पद ग्रहण करने में असमर्थता जाहिर की।
इसके बाद भी महामना ने कहा कि विश्वविद्यालय का अधिकांश काम तो सम कुलपति और विभागाध्यक्ष ही निपटा देते हैं। ऐसे में यदि वे कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में हर महीने सप्ताह के आखिर में केवल एक दिन भी रहे तो काम चल जाएगा। राधाकृष्णन को महामना की यह बात पसंद आई और उन्होंने कुलपति का पद अवैतनिक रूप से काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ग्रहण कर लिया। इसके बाद मालवीय जी के खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
