
सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
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आगरा में कारोबारी की बीमारी का फायदा उठाकर कारोबारी की फर्म पर पार्टनरों ने कब्जा जमा लिया। करोड़ों के सालाना टर्नओवर वाली फर्म के साथ ही दुकान और गोदाम से भी बेदखल कर दिया। फर्जी हस्ताक्षरों से वसीयत और बाद में पार्टनरशिप डीड बनवाकर धोखाधड़ी की। कारोबारी के भाई पर भी मिले होने का आरोप है। मामले में पुलिस ने जांच के बाद थाना मंटोला में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
दरेसी नंबर 3, मंटोला में बद्रीप्रसाद गयाप्रसाद नामक फर्म से लोहे का कारोबार होता है। इसके मालिक बसंतलाल अग्रवाल के बेटे अमन अग्रवाल ने मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंंने पुलिस को बताया कि पिता ने फर्म बनाई थी। दुकान और गोदाम मंटोला में पत्थर मंडी में हैं। चाचा हरिओम अग्रवाल फर्म में 50 फीसदी के साझीदार थे। वर्ष 2015 में पिता को पक्षाघात, ब्रेन हेमरेज सहित कई बीमारियां हो गईं। वह बिस्तर पर आ गए। इसके बाद फर्म का कामकाज हरिओम के हाथ में पहुंच गया।
अमन का कहना है कि वह अपने पिता की बीमारी के इलाज में लग गया। चार साल बाद जब उन्होंने फर्म में हिस्सा मांगा तो उसे धमकियां दी गईं। आरोप है कि इसी दरम्यान हरिओम, उनकी पत्नी निशा, महेशचंद्र जैन, मोहित जैन, पंकज गोयल और संजय शर्मा ने धोखाधड़ी करके उनकी दुकान, गोदाम पर कब्जा जमा लिया। लाभांश के 3.50 करोड़ रुपये भी देने से इनकार कर दिया। संपत्ति हथियाने के लिए आरोपियों ने कूट रचित दस्तावेज बनवाए। उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर किए। फर्जी वसीयत और पार्टनरशिप डीड भी बना ली। जबकि उसकी फर्म के लेनदेन का ब्योरा आयकर विभाग में दर्ज है।
इसी बीच फर्जीवाडे़ की ऑडियो रिकार्डिंग भी सामने आ गई। अमन और उसके परिजन ने पुलिस अफसरों से पूरे मामले की शिकायत की। डीसीपी ने इस मामले में एसीपी मयंक तिवारी से जांच करवाई। जांच के बाद विधिक राय ली गई। इसके बाद हरिओम सहित 6 आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
