अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा कि त्याग के माध्यम से जीवन में आत्मशांति मिलती है। त्याग को मुक्ति का द्वार बताते हुए उन्होंने कहा कि त्याग में ही सच्चा सुख है, इसलिए हमें त्याग धर्म को स्वीकारना चाहिए। वह पर्यूषण पर्व पर अभिनंदनोदय तीर्थ में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनि श्री ने कहा कि त्याग हमारी आत्मा को स्वस्थ और सुंदर बनाता है जिसको धारण करने पर सुख मिलता है। त्याग एक ऐसा धर्म है जिसके बिना हमारा जीवन कष्टमय हो जाता है। उन्होंने प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से श्रावकों को त्याग धर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन प्रवीण चौधरी, गुलाबचंद जैन, हरीष सिंघई, राजेंद्र डोंगरया, राजेश जैन ने किया। तत्वार्थ सूत्र का अर्घ्य आर्ची जैन एवं खुशी जैन एवं अर्घ्य समर्पण वीरेंद्र जैन, सुखा जैन, विकल्प जैन, सुरेंद्र जैन ने किया।
जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडै़या ने बताया कि दिगंबर जैन पंचायत के तत्वावधान में आचार्य विद्यासागर गो उपचार केंद्र एवं संत सुधासागर पक्षी चिकित्सालय के लिए समाज के श्रेष्ठीजन मुनिश्री की प्रेरणा से संकल्पित हो रहे हैं।धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया। शाम को अभिनंदनोदय तीर्थ पर 48 दीपों से भक्तांमर आरती में श्रावक सम्मिलित हुए।
जैन अटामंदिर में पंकज जैन शास्त्री ने कहा कि शांति और निराकुलता त्याग मार्ग में ही संभव है। प्रातःकाल तत्वार्थ सूत्र का वाचन रिचा जैन, प्रियंका, संगीता नायक, भव्या खुशी ने किया एवं अर्घ्य प्रकाश चंद अनमोल, डॉ. सत्येंद्र जैन ने समर्पित किए। शाम को सामान्यज्ञान प्रतियोगिता हुई, जिसमें अंशिका जैन गुगरवारा ने प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। पार्श्वनाथ जैन नया मंदिर में चन्द्रप्रभु महिला मंडल द्वारा खुला प्रश्नमंत्र का आयोजन हुआ, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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बुजुर्ग मातापिता को कभी वृद्धाश्रम न भेजें
जैन मंदिर बाहुबलि नगर में बच्चों ने तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की रचना बनाई जिसको श्रेष्ठीजनों ने प्रोत्साहित किया। इस दौरान आगम जैन, लकी जैन बाबा आदि मौजूद रहे। नीली श्राविका बहुमंडल ने वृद्धावस्था में माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ने के दृश्य का चित्रण किया। नाटिका के माध्यम से संदेश दिया गया कि बुजुर्ग माता-पिता को कभी भी वृद्धाश्रम न भेजें। इसके अतिरिक्त नईबस्ती आदिनाथ मंदिर चंद्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर में इन दिनों धर्म की अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है।
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बाबा पारसनाथ भगवान का अभिषेक शांति धारा हुई
जखौरा। पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व पर रविवार को उत्तम त्याग के दिन सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा मंदिर में बड़े बाबा पारसनाथ भगवान का अभिषेक शांति धारा का नित्य पूजा पाठ कर भक्तांबर विधान किया गया। इस मौके पर धर्मेंद्र जैन, आबू जैन, दीपक जैन, अशोक जैन, अमित जैन, पवन जैन, अनिकेत जैन, डॉ राजकुमार जैन आदि मौजूद रहे। संवाद
त्याग से ही व्यक्ति बनता महान : मुनि अक्षय सागर
मड़ावरा। वर्णीनगर में मुनि अक्षय सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व हमें संदेश देकर जाते हैं कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति महान बनता है।
उत्तम त्याग धर्म हमें मुक्ति के पथ पर चलाता है। ”त्याग” शब्द से ही पता लग जाता है कि इसका मतलब छोड़ना है और जीवन को संतुष्ट बनाकर अपनी इच्छाओं को वश में करना है। यह न सिर्फ अच्छे कर्मों में वृद्धि करता है, बल्कि बुरे कर्मों का नाश भी करता है। उन्होंने कहा कि त्याग की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है, क्योंकि जैन संत सिर्फ घर, द्वार ही नहीं कपड़ों का भी त्याग कर देते हैं। त्याग की भावना भीतरी आत्मा को शुद्ध बनाकर ही होती है। प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा करने का सौभाग्य एवं समवशरण महामंडल विधान में मुख्य पात्र बनने का सौभाग्य नाथूराम, शैलेंद्र, संदीप, सजल, सिद्धांत, राजेंद्र जैन, अंकित जैन, सनत परिवार को प्राप्त हुआ।
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आठवें दिन उत्तम त्याग को किया अंगीकार
तालबेहट। सिद्धक्षेत्र पवागिरि सहित दोनों जैन मंदिरों में रविवार सुबह नित्यमय अभिषेक के बाद शांतिधारा, पूजन विधान का आयोजन हुआ। भगवान पारसनाथ की विशेष पूजन अर्चना के साथ उत्तम तप धर्म की आराधना की गई।
धर्म श्रेष्ठियों ने आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण कर ज्ञान दीप प्रज्वलित किया। संतोष कुमार ने कहा कि आत्मा को सोने की तरह तपाना और उसमें से शुद्ध सोना निकालना त्याग है। बिना त्याग के मानव जीवन व्यर्थ है। दुनिया में जिसने भी त्याग किया है, वह महान बना और पूज्य हो गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। पर्व प्रथम, सिद्धम द्वितीय, आन्या एवं आरोही तृतीय रहीं।
