Permission will not be given without CCTV consent

सीसीटीवी कैमरा से रिकोर्डिंग होते हुए
– फोटो : प्रतीकात्मक

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हाथरस हादसे की जांच में एक बड़ा सवाल और सबक सामने आया है। अनुमति लेकर इतना बड़ा आयोजन किया जा रहा था। मगर आयोजकों द्वारा समय के साथ सबसे ज्यादा जरूरी संसाधन या सुरक्षा उपकरण सीसीटीवी नहीं लगवाए गए थे। एक तो सवाल ये कि ऐसा क्यों? मगर निर्णय ये लिया गया है कि अब इस तरह के किसी भी आयोजन की सीसीटीवी सहित अन्य जरूरी संसाधनों की सहमति बिना अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह पहला मौका नहीं है। अलीगढ़ व हाथरस में इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। खुद भोले बाबा के सत्संग का आयोजन भी अपने जिले में होता रहा है। आखिरी आयोजन 2022 में हुआ था। हालांकि 2023 में भी इस आयोजन की अनुमति मांगी गई थी। मगर निकाय चुनाव से जुड़ी व्यस्तता का हवाला देकर अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद अब यह आयोजन हाथरस में किया गया। यह आयोजन भी इतने ही बड़े स्तर पर किया गया, जितने बड़े स्तर पर अलीगढ़ में तालानगरी के मैदान में होता रहा है। 

मगर इस आयोजन में प्रशासनिक अनुमति के बाद भी सीसीटीवी नहीं लगवाए गए। न इतनी भीड़ को लेकर निकास या प्रवेश के अलग अलग द्वार बनाए गए। बाबा को जिस रास्ते से आना जाना था। बस उसी रास्ते पर सुरक्षा का पूरा फोकस निजी स्तर पर रखा गया। अब इस हादसे के बाद प्रशासन ने सबक के साथ निर्णय लिया है। आयोजक जब भी इस तरह के आयोजनों की अनुमति लेने पहुंचेंगे तो भीड़ को लेकर सटीक अनुमान पूछा जाएगा। लिखित में पहले की तरह ही लिया जाएगा। 

साथ में उसके अनुसार आयोजन स्थल का पूरा ले-आउट मैप भी समझा जाएगा। उसके अनुसार किए जा रहे सुरक्षा व जरूरी इंतजामों पर भी निर्णय लिया जाएगा। साथ में लिखित में ये सभी सहमति लेने के साथ सीसीटीवी की अनिवार्यता की शर्त भी अनुमति में होगी। तभी यह अनुमति जारी होगी। अपर जिलाधिकारी अमित कुमार भट्ट ने बताया कि बड़े आयोजनों में सीसीटीवी अनिवार्य होगा। 

अलीगढ़-हाथरस में होते रहते हैं बड़े धार्मिक आयोजन

ब्रज से जुड़ा होने के कारण अलीगढ़ में और ब्रज की द्वार देहरी कहे जाने वाले हाथरस में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। कभी उनका स्वरूप इलाका, मोहल्ला या क्षेत्र स्तर का होता है, तो कभी शहर, जिला या मंडल स्तर का होता है। कई बार प्रदेश स्तर के आयोजन भी होते रहे हैं। पिछले वर्ष ही अपने जिले में खैर के गौतम के पास संत निरंकारी समागम हुआ था, जिसमें कई राज्यों के लोग जुटे थे। इसके अलावा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा तय हुई थी। मगर बाद में उनका आना स्थगित हो गया था। पिछले दिनों हाथरस में भी एक बड़े स्तर की श्रीराम कथा हुई थी।



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