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पीलीभीत में मारे गए थे तीन आतंकी – फोटो : अमर उजाला
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याद करिए नब्बे का वह दशक… जब तराई के जिलों का कोना-कोना खालिस्तान समर्थक आतंकियों से थर्राता था। तकरीबन तीन दशक बाद वैसी दहशत तो नहीं, पर खालिस्तानी आतंकियों के लिए ये इलाका सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। पंजाब में होने वाली ज्यादातर वारदातों के तार तराई के जिलों से किसी न किसी रूप में जुड़ते ही आ रहे हैं।
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पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिले की 150 किलोमीटर से अधिक लंबी नेपाल सीमा तराई को आतंकियों के लिए सुरक्षित बनाती है। यहां चौकसी के तमाम दावों के बीच पगडंडियों वाले कई ऐसे रास्ते हैं, जिनके जरिये बेरोकटोक नेपाल में दाखिल हुआ जा सकता है।
पंजाब में पुलिस चौकी पर हमले के बाद भागे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के तीनों आतंकी भी इसी इरादे से पीलीभीत पहुंचे थे। हालांकि, उनके पीछे लगी पंजाब पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर 23 दिसंबर को तीनों को मार गिराया।
पाकिस्तान प्रायोजित मॉड्यूल से जुड़े इन खालिस्तानियों के दखल से तराई क्षेत्र को पूरी तरह मुक्त कराने की चुनौती अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने है। खालिस्तान समर्थक आतंकियों को पाकिस्तानी सरकारों और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती भी उसी दौर से मिलती आ रही है, जब वे अपने लिए अलग देश की मांग को लेकर खूनखराबा कर रहे थे।