संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 16 Jan 2024 07:58 AM IST

मुनव्वर राना को वसीम बरेलवी ने दी श्रद्धांजलि
– फोटो : अमर उजाला
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मकबूल शायर मुनव्वर राना के दुनिया से रुखसत होने पर प्रसिद्ध शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी को बेहद मलाल है। उनका कहना है कि मुनव्वर राना के जाने से पूरे हिंदी-उर्दू अदब के लोग गम में हैं। जाती तौर पर कहें तो वह मेरे सामने दाखिल हुए और उन्होंने अपनी जगह बनाई। गद्य हो पद्य दोनों में उन्होंने अपने जौहर दिखाए और सफलता प्राप्त की।
प्रो. वसीम बरेलवी ने बताया कि मुशायरों में कई बार हम लोग मंच पर साथ रहे। हिंदुस्तान से लेकर विदेश तक, उन्होंने मुझे हमेशा इज्जत दी। उन्होंने उनकी शायरी पर कहा कि उर्दू शायरी में उन्होंने घरेलू रिश्तों और विशेष तौर पर ‘मां’ को गजल में एक पात्र के तौर पर पेश करके अपनी अलग पहचान बनाई और लोकप्रियता हासिल की, जो मिसाल है। वह बहुत जहीन थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शेरो अदब के लिए समर्पित कर दी। वह बहुत दिलचस्प इंसान थे। बहुत ही खुशमिजाज और हंसमुख थे, माहौल को बांधे रखते थे।
उन्होंने बहुत ही मायूसी भरे अंदाज में कहा कि राहत इंदौरी के बाद अब मुनव्वर चले गए, बशीर बद्र साहब बीमार चल रहे हैं। एक तरह से पूरा उर्दू अदब का मंच खाली होने लगा है। मुनव्वर राना के लिए मगफिरत की दुआ करते हुए उन्होंने शेर पढ़ा- वो मुझे छोड़ के यूं आगे बढ़ा जाता है, जैसे अब मेरा सफर खत्म हुआ जाता है…।
