मथुरा के छाता उपडाकघर दिसंबर 2024 में छाता उपडाकघर में जाली टिकट लगाकर डाक भेजने का मामला सामने आया था। विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद उप डाकपाल मदन लाल और लिपिक मोहित को निलंबित कर दिया था और मामले की जांच के आदेश दिए थे।

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सहायक प्रवर डाक अधीक्षक की अध्यक्षता में गठित टीम ने गहराई से जांच की तो पता चला कि यह फर्जीवाड़ा उनकी सोच से भी बड़ा है। मई 2024 से 7 दिसंबर 2024 तक कुल 127176 लिफाफों में कुल 31.79 लाख रुपये की जाली टिकट लगाईं गईं। प्रत्येक लिफाफे पर 26 रुपये की टिकट लगाई गई, जिसमें पांच, दस, 15 और 20 रुपये की टिकट जाली और एक रुपये की टिकट असली थी। लाखों रुपये जाली टिकट लगाकर डाक विभाग को नुकसान पहुंचा गया। इस बीच छाता उप डाकघर में केवल 25 हजार रुपयों की ही टिकटें बिकीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद अब विभाग एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है।

कई राज्यों में डाक भेजने के पते पर गईं टीमें

दरअसल, जाली टिकट लगाकर 12 राज्यों में डाक भेजी गई थी। ऐसे में टीम को भी हकीकत जानने के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात समेत अन्य कई राज्यों में उन पतों पर जाना पड़ा, जहां डाक भेजी गई थी। यहां से लिफाफों को कब्जे में लेने के बाद टिकट की जांच के लिए नासिक भेजा। नासिक से डाक विभाग के अधिकारियों ने टिकटें फर्जी होने की पुष्टि की।

बुलंदशहर में हुए फर्जीवाड़े से जुड़े हो सकते हैं तार

सबसे पहले बुलंदशहर स्थित डाकघर में जाली टिकट लगाकर डाक भेजने का मामला सामने आया था। इस मामले में तीन आरोपियों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। छाता उपडाकघर में मामला सामने आने के बाद अधिकारियों को आशंका है कि कहीं बुलंदशहर से ही इसे फर्जीवाड़े के तार तो नहीं जुड़े हैं। इसके लिए डाक विभाग द्वारा सीबीआई और बुलंदशहर पुलिस को भी पत्र भेजा जाएगा।

प्रवर डाक अधीक्षक  विजेंद्र ने बताया कि छाता उपडाकघर से 1.27 लाख लिफाफों पर जाली टिकट लगाकर डाक भेजी गई थी। इसमें दो कर्मचारी निलंबित चल रहे हैं। इसके साथ विभाग को 31 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। जल्द ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।



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