लाजवाब स्वाद की पहचान बनाए 3797 और सूर्या किस्म का आलू रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला में पास हो गया है और उसने बिना किसी शर्त के इसके आयात को मंजूरी दे दी है। चिप्सोना का सैंपल फेल हो गया है। एपिडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि अब देश से बड़े पैमाने पर आलू का निर्यात संभव हो गया है।
हाथरस ही नहीं, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, मथुरा, एटा, कन्नौज, फर्रूखाबाद, कानपुर जिलों के आलू किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। हाथरस को 3797 वैरायटी का चार लाख पैकेट का आर्डर मिला है। जिले के सादाबाद क्षेत्र से आगामी अप्रैल में पहली खेप जाएगी और सितंबर तक निर्यात होता रहेगा।
पिछले साल यूपी से 3797, सूर्या और चिप्सोना आलू को सैंपल के तौर पर रूस भेजा गया था। हाथरस से 3797 के 10 हजार पैकेट सैंपल के भेजे गए थे। इनमें 3797 और सूर्या के सैंपल रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता, स्वाद, संरचना व भंडारण आदि मानकों पर खरे उतरे हैं।
रूस को आलू निर्यात करने की यह शुरुआत सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।-देवेंद्र सिंह, आलू किसान।
सादाबाद का आलू यदि लगातार निर्यात चेन में शामिल रहा तो आने वाले समय में यह क्षेत्र विश्व मानचित्र पर अपनी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ सकता है।-गंभीर सिंह, आलू किसान।
रूस की यह मंजूरी किसानों को बड़ी राहत देगी। उन्हें बेहतर दाम दिलाने के साथ-साथ मंडी व व्यापारियों के एकाधिकार को भी कमजोर करेगी। यह किसानों की जीत है।-राजेश चौधरी, आलू किसान।
हाथरस से आलू का बड़ा निर्यात शुरू कराने का प्रयास लगातार जारी है। वर्ष 2019 से इसमें काम हो रहा है। रूस से शुरुआत हो रही है। दूसरे देशों में भी इसका प्रयास जारी है। किसानों को आलू की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।-सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
