
रायबरेली में आईटीआई मैदान पर आयोजित चुनावी जनसभा में सोनिया गांधी से मिलते पूर्व मुख्यमंत्री अख
चुनाव प्रचार खत्म होने से एक दिन पहले गठबंधन और भाजपा के नेताओं ने दिखाई ताकत
रायबरेली। रायबरेली लोकसभा का चुनावी मैदान शुक्रवार को वैशाख की गर्मी के साथ सियासी धुरंधरों की मौजूदगी में तप गया। चुनाव प्रचार खत्म होने के 24 घंटे पहले गठबंधन और भाजपा के बीच ताकत की जोर आजमाइश सियासी रण क्षेत्र में दिखी।
रायबरेली में शुक्रवार को नया सियासी इतिहास बना। गठबंधन तथा भाजपा ने अपने रणनीति के तरकश में भरे तीर से चुनाव को बेहद हॉट सीट में तब्दील कर दिया। चुनाव प्रचार के निर्णायक घंटों में दोनों
तरफ से ताकत का प्रदर्शन कर एक दूसरे पर अंतिम बड़ा सियासी वार किया गया। लोकसभा सीट के चुनावी इतिहास में पहली बार गांधी परिवार के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंच को साझा कर 2009 से चल रही वॉकओवर नीति से इतर संयुक्त रूप से भाजपा को ताकत दिखाई। इससे पहले कभी भी लोकसभा के चुनाव में सपा के किसी नेता ने कांग्रेस के मंच को साझा नहीं किया। यहां तक की कार्यकर्ता भी कभी एक दूसरे के गलबहियां नहीं डालते थे। शुक्रवार को तपती दोपहर में दोनों दलों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दिल मिलाते दिखे।
उधर शुक्रवार को प्रचंड गर्मी के बीच जगतपुर में ऊंचाहार विधायक मनोज पांडे ने सपा की साइकिल से उतरकर भाजपा का कमल थामकर सियासत को तपा दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सामने विधायक मनोज पांडेय ने भाजपा का दामन थामा तो सियासी समीकरणों की एक नई कड़ी खुल गई। जिसने चुनाव मैदान में चली जा रही सियासी रणनीति को धारदार बना दिया है। (संवाद)
जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास
भाजपा के पाले में ऊंचाहार विधायक मनोज पांडे के आने से 11 फीसदी वोट शेयर वाले ब्राह्मणों को साधने की पूरी तैयारी की गई है। भाजपा का थिंकटैंक 2014 के बाद से कद्दावर ब्राह्मण चेहरे की तलाश कर रहा था। यह मिशन अब सफल हो सका है। वहीं, कांग्रेस इंदिरा गांधी के समय से ब्राह्मण वोट शेयर को साधती रही है और इसी कारण सोनिया गांधी की समन्वय टीम में चार सदस्य ब्राह्मण हैं तो साथ ही राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे भी रायबरेली में डेरा डाले हुए हैं।
