Rahul in Amethi: This time he did not get down from the car, did not go among the people, the message is that

अमेठी पहुंचे राहुल गांधी।
– फोटो : अमर उजाला

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 गांधी परिवार का कोई सदस्य शहर से गुजरे और गाड़ी से उतरकर लोगों से हाथ तक न मिलाए, अमेठीवासी यह सोच भी नहीं पाते थे। लेकिन, सोमवार को राहुल गांधी का अंदाज अलग सा था। कुछ अनमने से।पिछली बार राहुल जब यहां आए थे तो लोगों से घुले-मिले थे, लेकिन इसबार ऐसा नहीं दिखा। हालांकि, सियासी स्तर पर वह ज्यादा स्पष्ट दिखे। भावुकता में बहे बिना अपनी बातें कहीं। उनके इस व्यवहार की लोग चर्चा भी करते रहे।

सोमवार को अमेठी में राहुल गांधी ने वाहन से ही 35 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने लोगों को देखकर हाथ हिलाया, मगर कहीं उतरे नहीं। किसी बच्चे को दुलराया नहीं, न ही किसी बुजुर्ग का हालचाल पूछा। गांधी परिवार के सदस्य पहले अक्सर यह सब करते थे। मंच से जब कांग्रेस के सारे नेता अमेठी से गांधी परिवार के भावनात्मक रिश्ते की बात कर रहे थे, उस दौरान भी राहुल ने अपने और अमेठी के रिश्ते को केवल एक ही वाक्य में यह कहकर परिभाषित किया कि अमेठी और उनका गहरा व प्यार का नाता है। हालांकि अमेठी के लोगों ने राहुल के स्वागत और उनके प्रति पहले सी आत्मीयता दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जनसभा स्थल तक पहुंचने के दौरान राहुल को देखने और स्वागत करने के लिए लोग जगह-जगह उमड़े। राहुल को सुनने के लिए भी अच्छी-खासी संख्या में लोग पहुंचे।

हार की टीस अब भी है

राहुल के बदले-बदले से अंदाज पर जगह-जगह चर्चाएं होती रहीं। स्टेशन चौराहे पर चाय की चुस्कियों के बीच बुजुर्ग लक्ष्मण प्रसाद व भवानी शंकर कहते दिखे कि राहुल का वह पहले जैसा अपनापन नहीं दिखा। जामो मोड़ के पास मिले धर्मेंद्र शुक्ल का कहना था कि पहली बार वह बिना लोगों से मिले, बस हाथ हिलाकर चल दिए। कहीं न कहीं, उनके मन में वर्ष 2019 की हार की टीस जरूर है। कलेक्ट्रेट आए जगदीशपुर के भीखीराम का कहना था कि राहुल गांधी बचपन से पिता के साथ आते रहे हैं। उनके पिता राजीव गांधी अपनी गाड़ी रोक कर लोगों से मिलते थे। राहुल भी पहले परिवार की तरह ही मिलते थे। बाजार में अशर्फीलाल सहित कई लोगों के यहां वह क्षेत्र भ्रमण के दौरान मिलते और उनसे हाल-चाल लेते।

अमेठी के राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि राहुल गांधी दो साल बाद आए, लेकिन उनमें अपने लोगों के प्रति पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी। अंकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि सांसद के रूप में जब राहुल गांधी आते थे, उस समय उनके मिलने का अंदाज और बातें दोनों अलग थीं। शान मोहम्मद ने कहा कि जैसे इस बार कुछ परिवर्तन दिखा। भीड़ देखने के बाद राहुल गांधी तत्काल उतरते थे और लोगों से मिलते और उनका हाल-चाल जानते लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखा। 



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