कानपुर में अधिवक्ता राजाराम वर्मा ने मौत के दो साल पहले ही अपनी हत्या की आशंका जता दी थी, उन्हें जमीन के विवाद में हत्या किए जाने का डर था। उन्हें लगता था कि जमीन के विवाद में एनआरआई सिटी के निदेशक और अन्य लोग उनकी हत्या करा सकते हैं। ऐसे में उन्होंने वर्ष 2019 में ही एंटी भूमाफिया सेल, डीएम कार्यालय, नवाबगंज थाने को भेजी ई-मेल में इसकी आशंका जता दी थी।
पुलिस अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही है। साथ ही जमीन कब्जे के मामले की जांच एसआईटी करेगी। अधिवक्ता राजाराम ने वर्ष 2010 में जमीन के विवाद में 18 लोगों के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी, दस्तावेजों में जालसाजी आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की अग्रिम विवेचना कर रहे कोतवाली प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि इसमें से केवल राजबहादुर, रामकुमार और रामचंदर के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था।
