
प्रत्याशी चुनने में मोदी और शाह की अहम भूमिका मानी जा रही है।
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लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के जरिए उत्तर प्रदेश में पिछड़ा और महिला कार्ड खेला है। सात में से चार प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से मैदान में उतारकर पार्टी ने प्रदेश में ओसीबी की प्रमुख जातियों को प्रतिनिधित्व दिया है। वहीं दो महिला उम्मीदवार उतारकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किए जा रहे अपने वादे को पूरा करने का संदेश दिया है। अपने परंपरागत वोट बैंक ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य का भी ध्यान रखा है।
भाजपा ने ब्राह्मण समाज से सुधांशु त्रिवेदी और वैश्य समाज से नवीन जैन को प्रत्याशी बनाया है। वहीं साधना सिंह को प्रत्याशी बनाकर महिला और क्षत्रिय दोनों निशाने साधे हैं। पार्टी ने लोकसभा चुनाव में 60 प्रतिशत वोट हासिल करने के लिए पिछड़ों पर जोर दिया हैं। प्रदेश में पिछड़े वर्ग में कुर्मी, जाट, बिंद और मौर्य को भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। प्रदेश के करीब 12 फीसदी कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए पूर्वांचल के कुर्मी नेता आरपीएन सिंह को मौका दिया है। वहीं कुर्मी, कुशवाहा, शाक्य, सैनी वोट बैंक को साधने के लिए अमरपाल मौर्य को टिकट दिया है।
रालोद से गठबंधन की चर्चा के बीच पार्टी ने मथुरा के पूर्व सांसद तेजवीर सिंह को टिकट देकर पश्चिमी यूपी में जाट वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। पूर्वांचल में गाजीपुर, बलिया, मऊ, चंदौली और वाराणसी में बिंद मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। बिंद मतदाताओं में आधार बढ़ाने के लिए पार्टी ने संगीता बलवंत बिंद को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है।
भाजपा के जिन नौ सदस्यों का कार्यकाल 2 अप्रैल 2024 को पूरा हो रहा है। उनमें केवल कांता कर्दम महिला सदस्य हैं। पार्टी की ओर से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के बीच अभियान चलाए जा रहे हैं। पार्टी महिलाओं को बताने का प्रयास कर रही है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए यह अधिनियम मंजूर कराया है। इसे साकार करने के लिए पार्टी ने राज्यसभा में एक की जगह दो महिलाओं को टिकट दिया है।
एससी को नहीं मिला टिकट
राज्यसभा में भाजपा की कांता कर्दम अनुसूचित जाति से हैं। लेकिन, मौजूदा सात प्रत्याशियों में एक भी एससी नहीं हैं। वर्तमान में अनिल जैन और अनिल अग्रवाल वैश्य समाज से हैं, लेकिन इस बार केवल वैश्य समाज से नवीन जैन को टिकट मिला है। ब्राह्मण समाज से अशोक बाजपेयी और सुधांशु त्रिवेदी राज्यसभा सदस्य हैं। सुधांशु को ही दोबारा मौका मिला है।
चंदौली की ताकत बढ़ी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चंदौली की राजनीतिक ताकत बढ़ी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंदौली से है। राज्यसभा सदस्य दर्शना सिंह भी चंदौली से हैं। अब चंदौली की ही साधना सिंह का भी राज्यसभा जाना पक्का है।
