यह प्रतीक्षा केवल भूमि की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था की प्रतीक्षा थी। कलियुग में मिली यह त्रेतायुग जैसी खुशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ संकल्प शक्ति से संभव हुई है। रामलला का मंदिर भारत की आत्मा का पुनर्जागरण है। ध्वजारोहण समारोह धर्म, सत्य और मर्यादा की विजय का घोष है।– महंत गिरीश दास
अयोध्या ने 500 वर्षों का वनवास सहा है। जैसे राम वन से लौटकर मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर आए थे, वैसे ही सदियों बाद यह धरती फिर धर्म और न्याय की विजय का साक्षी बनी है। आज का उत्साह त्रेतायुग की स्मृति को जीवंत कर रहा है। यह सिर्फ राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण नहीं रामराज की घोषणा है।– महंत डॉ. भरत दास
रामनगरी की आंखों में आज जो चमक है, वह 500 साल के विरह के बाद मिला सुख है। मंदिर की पूर्णता घोषित करने वाला ध्वजारोहण समारोह का यह क्षण बताता है कि सत्य और धर्म भले विलंबित हों, पर विजयी अवश्य होते हैं। यह अयोध्या का पुनर्जन्म है। यह समारोह विश्व को संदेश देगा कि राम का मार्ग ही मानवता का मार्ग है।– महंत राम दास
न्याय की स्थापना करेगा ध्वजारोहण समारोह
रामनगरी के शिखर पर जो ध्वज फहराने जा रहा है, है, उसकी लंबाई-चौड़ाई यूं ही नहीं तय हुई है। अंक ज्योतिष की गणना में इसके मायने समझ में आते हैं। ध्वज का आकार 22 गुणे 11 फीट है। इसको गुणा करने पर 242 का अंक आता है, जिसका गुणांक आठ है। आठ को न्याय के देवता शनि का अंक माना जाता है। यह कहा जा सकता है कि राम मंदिर के शिखर यानी अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुके हैं। जो मर्यादा में रहेगा सुखी रहेगा, जो मर्यादा विहीन आचरण करेगा उसका रावण जैसा हश्र होगा।– महंत विवेक आचारी



