Ram Mandir Ban on removal of idol permission given for worship story of struggle for liberation from Saryu

Ram Mandir
– फोटो : अमर उजाला

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रामलला प्रगट हुए या उन्हें 22-23 दिसंबर, 1949 की मध्यरात्रि मेरे जल में स्नान करने वाले साधुओं ने रखा…यह आपके विवेक पर छोड़ती हूं। मैं अपनी दृष्टि घटनाक्रम पर ही केंद्रित रखना चाहती हूं। प्रधानमंत्री नेहरू की नाराजगी के बावजूद मूर्ति नहीं हट पाई। प्रशासन ने पूरे परिसर को सील कर अटैच कर लिया। 

रिसीवर नियुक्त कर पूजा-पाठ शुरू करा दी गई। रिसीवर नियुक्त होने के बाद अयोध्या के जहूरबख्श और अनीसुर्रहमान ने प्रशासन से संबंधित स्थल पर नमाज पढ़ने की सुविधा और सुरक्षा मांगी। 

उसी बीच, गोपाल सिंह विशारद नाम के एक श्रद्धालु ने जनवरी, 1950 में फैजाबाद जिला न्यायालय में जहूरबख्श समेत अन्य तथा तत्कालीन जिला प्रशासन के खिलाफ केस कर श्रद्धालुओं को श्रीरामजन्मभूमि में विराजित रामलला के दर्शन-पूजन से रोकने का आरोप लगाया। 

जहूरबख्श, प्रशासन तथा पुलिस के हस्तक्षेप को अधिकारों का हनन बताते हुए निर्बाध दर्शन-पूजन के अधिकार की मांग की। आशंका जताई कि दूसरे पक्ष के दबाव में प्रशासन रामलला की मूर्ति हटा सकता है।

 



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