
बीएचयू
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बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी में देसी-विदेशी भाषा में रामायण पढ़ने को मिलता है। हर भाषा में रामायण के अलग-अलग नाम हैं। इसे स्नातक, परास्नातक और शोध छात्र भी पढ़ते हैं। दुर्लभ पांडुलिपियों को ऑनलाइन करने की दिशा में काम चल रहा है।
हिंदी, संस्कृत, उर्दू के साथ ही पुस्तकालय में गुजराती, मैथिली, तेलुगु, नेपाली, बंगाली भाषा में रामायण से जुड़ी पुस्तकें संग्रहित करके रखी गई हैं। हिंदी, संस्कृत और फारसी भाषा में रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियां देखने को मिल जाएंगी। जरूरत पड़ने पर छात्र-छात्रा या फिर शिक्षक इसका उपयोग भी करते हैं।
बीएचयू परिसर में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1941 में की गई थी। इसके तहत सेंट्रल लाइब्रेरी का संचालन किया जाता है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले रामायण की अलग-अलग भाषा और पांडुलियों को देखने, पढ़ने का महत्व बढ़ा है। उप पुस्तकालय अध्यक्ष रहे संजीव सराफ के मुताबिक, बीएचयू का पुस्तकालय समृद्ध है। ऐतिहासिक पुस्तकें, अभिलेखों के साथ ही कई भाषाओं के रामायण और पांडुलिपियां को सहेजकर रखा गया है।
