रामनगर की रामलीला के इतिहास में यह चौथा अवसर था जब ग्रहण के कारण रामजन्म की लीला का मंचन नहीं हुआ। चंद्रमा पर ग्रहण का संकट आया तो प्रभु श्रीराम कहां से अवतार लेते। चंद्रग्रहण और सूतक के कारण रामनगर की रामलीला में दूसरे दिन रामजन्म की लीला के स्थान पर लगातार दूसरे दिन दोपहर में क्षीरसागर की झांकी सजाई गई।

रविवार को रामनगर पोखरे ने क्षीरसागर का रूप लिया और वैकुंठ लोक में विराजे भगवान विष्णु और लक्ष्मी की आरती हुई। ढाई बजे होने वाली आरती देखने के लिए भारी संख्या में लीला प्रेमी जुटे। रविवार को रामलीला के दूसरे दिन श्रीराम जन्म की लीला होनी थी। लेकिन, ग्रहण के चलते सूतक लग जाने के चलते रामलीला संभव नहीं थी।

इसके चलते पहले से ही लीला स्थगित कर दी गई थी। चूंकि रामनगर की रामलीला की परंपराओं के अनुसार लीला विभिन्न वजहों से स्थगित होने पर आरती अवश्य कराई जाती है। उसी के अनुरूप रविवार को दोपहर में क्षीरसागर की झांकी और आरती की गई। अब सोमवार को श्रीराम जन्म की लीला होगी।

लीला प्रेमियों ने बताया कि श्रीरामलीला रामनगर के इतिहास में यह चौथी बार है कि रामजन्म की लीला के दिन ग्रहण लग जाने के कारण क्षीरसागर की झांकी दो दिन में कराई गई। भगवान के अवतार की लीला, ग्रहण के अगले दिन आश्विन कृष्ण प्रतिप्रदा यानी आठ सितंबर को संपन्न होगी। सामान्यतः श्री रामलीला रामनगर में भगवन आविर्भाव की लीला शुक्ल पक्ष में संपन्न होती है लेकिन इस साल कृष्ण पक्ष में होगी।

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