Ramnaresh slammed police inspector and put his foot on his chest five revolutionaries martyred in varanasi

भारत की आजादी में काशी का अनोखा इतिहास।
– फोटो : अमर उजाला

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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा…। जनपद का एकमात्र शहीद स्थल चोलापुर शहीद स्मारक…। 17 अगस्त 1942 को हुए पांच शूरवीरों की शहादत की स्मृतियां यहां आज भी जीवंत हैं।  

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17 अगस्त 1942 में चोलापुर क्षेत्र के आयर गांव में नाग पंचमी पर क्षेत्र के पहलवान दंगल में जोर आजमाइश कर रहे थे। अखाड़े में वीर बहादुर सिंह हाथ में तिरंगा लेकर पहुंचे और पहलवानों को ललकारते हुए कहा, हे शूरवीरों जंजीरों से जकड़ी धरती मां को छुड़ाने का प्रयास करो। जिस मिट्टी पर जोर आजमाइश कर रहे हो, वो धरती मां परतंत्रता की जंजीरों से जकड़ी हुई हैं।  

वीर बहादुर सिंह के आह्वान पर राम नरेश उपाध्याय उर्फ विद्यार्थी, पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, चौथी और निरहू के साथ कई लोग चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने के लिए चल पड़े। हजारों लोग इनके साथ हो लिए। 

चोलापुर थाने पर पहुंचकर स्व. बीरबहादुर सिंह ने झंडा फहराने का प्रयास किया। जिस पर तात्कालिक दरोगा रामचंद्र सिंह ने विरोध किया। रामनरेश उर्फ विद्यार्थी दरोगा रामचंद्र सिंह से भिड़ गए और उन्हें उठाकर जोरदार पटखनी देकर उसकी छाती पर पैर रख दिया। इतना देखते ही रामचंद्र के भतीजे ने रिवाॅल्वर से रामनरेश उर्फ विद्यार्थी को कनपटी पर गोली मार दी। जिससे वे मौके पर ही शहीद हो गए। 

मौजूद उच्चाधिकारियों ने भीड़ पर फायरिंग का आदेश दे दिया। फायरिंग में पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, चौथी एवं निरहू मौके पर ही शहीद हो गए। बहादुर सिंह को गिरफ्तार कर अंग्रेज बनारस ले गए। उन पर मुकदमा चला और सात साल सश्रम कारावास की सजा हुई। 



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