Rampur: Laborer dies after getting buried in sand, ruckus among family members in stone crusher

रामपुर स्टोन क्रशर में घटना के बाद पहुंचे परिजन
– फोटो : संवाद

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स्वार कोतवाली स्वार अंतर्गत उत्तराखंड सीमा स्थित पट्टीकलां गांव के जंगल साईं स्टोन क्रशर पर हुए हादसे में रेत की ढांग में दबकर 19 वर्षीय युवक आदर्श की मौत हो गई। मृतक काशीपुर उत्तराखंड के थाना आईटीआई क्षेत्र के दभौरा टांडा का रहने वाला था। उसकी मौत की सूचना मिलने पर परिजन रोते-बिलखते हुए मौके पर पहुंच गए।

उन्होंने हंगामा काटते हुए दढि़याल पुलिस पर हड़काने का आरोप लगाया। मौके पर पहुंचे सीओ ने उन्हें किसी तरह शांत किया। स्वार के पट्टीकलां क्षेत्र में साईं स्टोन क्रशर है। यहां ऊधम सिंह नगर के थाना आईटीआई काशीपुर के गांव दभौरा टांडा निवासी आदर्श पुत्र राजेश रात की ड्यूटी के दौरान मजदूरी करता था।

बताते है कि वह मंगलवार की रात लगभग आठ बजे स्टोन क्रशर पर ड्यूटी दे रहा था कि इसी दौरान रेत की ढांग उसके ऊपर आ गिरी जिसमें वह दब गया। आसपास काम कर रहे मजदूरों ने उसे दबते हुए देख कर मौके पर दौड़ पड़े। मजदूरों ने किसी तरह रेत हटाकर उसे बाहर निकाला। वह गभीर हालत में था और सांसे चल रही थी।

वह उसे लेकर तत्काल ही चिकित्सक के पास पहुंचे, लेकिन तब तक आदर्श दम तोड़ चुका था। दुर्घटना की जानकारी मिलने पर मृतक के माता-पिता समेत अन्य परिजन रोते-बिलखते हुए आ गए। परिजन ने हादसे में मौत को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे को देखते हुए मसवासी पुलिस के अलावा दढि़याल चौकी पुलिस को बुला लिया गया।

आरोप है कि पुलिस से उनकी नोकझोंक भी हुई, लेकिन ग्रामीणों के आ जाने पर पुलिस बैकफुट पर आ गई। परिजन का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें लाठिया फटकारते हुए धमकाने का प्रयास भी किया। कुछ देर बाद ही सीओ अरुण कुमार आ गए। उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को समझा बुझाकर शांत किया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए रामपुर भेज दिया। बुधवार की दोपहर बाद शव घर पहुंचा तो लोगों की भीड़ जुट गई। इस संबंध में मृतक के परिजन की ओर से कोतवाली पुलिस को तहरीर नहीं मिली है। कोतवाल संदीप त्यागी ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पीएम रिपोर्ट और तहरीर मिलने के बाद समुचित कार्रवाई की जाएगी।

दिन में कॉलेज की पढ़ाई और रात को मजदूरी करता था आदर्श

आदर्श के बारे में उसके गांव के लोगों ने बताया कि वह निर्धन परिवार से था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और तीन बहनों का अकेला छोटा भाई था। वह गांव के निकट लोहिया पुल गांव स्थित एक कॉलेज में कक्षा 11 का छात्र था। ग्रामीणों ने बताया कि गरीबी से जूझ रहे परिवार के पालन-पोषण के लिए वह दिन में कॉलेज से आने के बाद रात में स्टोन क्रशर पर मजदूरी करता था।

स्टोन क्रशरों पर हो चुकी हैं कई मजदूरों की मौत

स्टोन क्रशरों पर बीते दो दशक में कई मजदूरों की रेत की ढांग गिरने या फिर खनन से कोसी में हुए गहरे गडढों में डूब कर मौतें हो चुकी हैं। स्टोन क्रशरों पर श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन होता है। दुर्घटनाओं से बचने के लिए मजदूरों को हेलमेट आदि का बंदोबस्त तक नहीं है।

परिवार निर्धन वर्ग से होते हैं जिसके कारण वह क्रशर संचालकों का मुकाबला नहीं कर पाते। आरोप है कि क्रशरों पर हुई मजदूरों की मौतों के मामले अकसर ले देकर निपटा दिए जाते रहे हैं।

 



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