
भिनगा के पतिझिया के निकट राप्ती के पानी में डूबा थ्रेसर। -संवाद
खतरे के निशान से 190 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा नदी का जलस्तर, आठ गांवों में शुरू हुई कटानसंवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। जिले में शुक्रवार मध्य रात से शुरू हुई आफत की बरसात रविवार को भी जारी रही। इस दौरान जहां राप्ती का जल स्तर खतरे का निशान पार कर 190 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। वहीं सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों के उफान पर आने से भिनगा जंगल सहित भिनगा तेंदुआ व भुजंगा नव्वा नेवादा मार्ग डूब गए। राप्ती के बढ़े जलस्तर के कारण जहां आठ गांवों में नदी कटान कर रही है वहीं 32 गांव पूरी तरह पूरी तरह बाढ़ से घिरे हुए हैं। जबकि अतिप्लावन के कारण करीब 20 गांव टापू बन गए हैंं। इससे इन गांवों का एक दूसरे से संपर्क टूटा हुआ है।
जिले में राप्ती ही नहीं पहाड़ी नाले भी उफान पर हैं। नेपाल के कुसुम बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण राप्ती का जलस्तर रविवार सुबह खतरे का निशान 127.70 से बढ़ कर 129.60 मीटर पहुंच गया। जो खतरे के निशान से 190 सेंटीमीटर अधिक है। हालांकि दोपहर एक बजे से नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घटने लगा है। दो बजे जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 129.50 मीटर मापा गया।
नदी अपने घटते बढ़ते जलस्तर के कारण अपने तट पर स्थित मनिका कोट, नारायणपुर, नासिरगंज, फत्तेपुर तनाजा, दत्तनगर, अमवा, जोगिया व भगवानपुर गांव में कटान कर रही है। इसके साथ ही नदी का पानी जोगिया, कोटवा, दहावरकला व मोहम्मदपुर कला, सलारू पुरवा, बरंगा, हरिहरपुर, करनपुर, गुरूआ, गुरुदत्त पुरवा, लाहौर कला, लक्ष्मणपुर सेमरहनिया, असरफा बाजार, भीखमपुर जगरावलगड़ी सहित 32 गांवों में प्रवेश कर गया। जहां घरों में पानी आ जाने से लोग घर की छतों पर चारपाई व तखत पर पन्नी व तिरपाल तान कर डेरा जमाए हुए हैं।
राप्ती ही नहीं पहाड़ी नाले भी बरपा रहे कहर
जिले सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण सिरसिया क्षेत्र का सोहेलवा व भिनगा जंगल पानी से जलमग्न हो गया है। इससे जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं के प्रकृतिवास पर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जंगल में रहने वाले गाय भैंस मुख्य मार्ग की पटरियों पर डेरा जमाए हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ हिंसक जीव जंतु पेड़ व ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इतना ही नहीं सिरसिया क्षेत्र के डगमरा, सूरजकुंड व भैंसाही सहित अन्य पहाड़ी नालों के उफान पर आ जाने से आसपास के खेत जलमग्न हो गए हैं। वहीं केन नाला के उफान पर आ जाने से भिनगा ताल बघौड़ा, भुजंगा नव्वा मार्ग पर पानी आने से आवागमन बाधित हो गया है। यदि इसी तरह जंगल में पहाड़ी नाले का जलस्तर बढ़ा तो भिनगा सिरसिया व भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर आवागमन बाधित हो सकता है।
यहां बारिश बनी आफत
जिले में शुक्रवार रात 29 एमएम बरसात हुई, जबकि शनिवार को 36 तो रविवार को शाम तीन बजे तक 69 एमएम बरसात रिकार्ड की गई। यह बरसात इकौना नगर सहित आसपास के गांवों में आफत बनी हुई है। तेज बरसात के कारण जहां इकौना ब्लाक परिसर, सीएचसी, बीईओ कार्यालय, थाना परिसर व इकौना देहात में करीब दो फीट तक पानी भरा हुआ है। इकौना नगर के प्रमुख मार्ग व गलियां नाला बन गई है।
तटबंध को बचाने के लिए शुरू हुआ राहत कार्य
हरिहरपुररानी के अशरफ नगर गांव के निकट परसा तिलकपुर तटबंध पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण कटान शुरू हो गई। इसकी सूचना के बाद डीएम ने बाढ़ खंड को तत्काल मौके पर पहुंच कर तटबंध को बचाने का निर्देश दिया। सूचना के बाद पहुंचे कर्मी राहत बचाव कार्य में जुट गए हैं।
जिले में 19 बाढ़ चौकियों की स्थापना कर सभी चौकियों पर प्रभारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही बाढ़ शरणालयों व पशु शिविरों की स्थापना कराई गई है। जहां राहत सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिसके नंबर 8545092198 पर 24 घंटे सूचना दी जा सकती है। जिले में चार बोट सहित 35 जवान तैनात है। अयोध्या से 15 मोटराइज्ड नाव भी मंगाई गई है। जिले में दो टीम पीएसी फ्लड व एक बटालियन एनडीआरएफ तैनात है। यदि कहीं भी बाढ़ की स्थिति बनती है तो उसके लिए तत्काल उन्हें भेजा जायेगा। राप्ती बैराज घटते-बढ़ते जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। फिलहाल अब नदी का जलस्तर घटने लगा है।
