क्रोध से धधकती आंख और दोनों हाथों में तलवार। कभी तोप से निकलते आग के गोले तो कभी ताड़का का अट्टहास। उत्तर भारत की ऐतिहासिक रामलीला में बुधवार को लाला चन्नोमल की बारहद्वारी, गली मन:कामेश्वर रावतपाड़ा से दशानन अपनी सेना और परिवार के साथ अपने राजा होने की दुहाई देने के लिए नगर भ्रमण पर निकला। यात्रा में रावण के सेनापति, कुंभकरण, मेघनाद के साथ ताड़का को देख छोटे बच्चे डरे सहमे नजर आए।
बैंड बाजों के साथ यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई वापस मन:कामेश्वर पर संपन्न हुई। यात्रा का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने किया। शोभायात्रा में सबसे आगे दो ऊंट और उसके पीछे ताड़का की सवारी थी। ताड़का के पीछे कारागार में बंद साधुओं की झांकी रावण के अत्याचार का वर्णन कर रही थी। इस झांकी पर लगी रावण की तोप पूरे रास्ते आग के गोले बरसाती रहीं। शोभायात्रा में रावण के सेनापतियों, के पीछे कुंभकरण, फिर इंद्रजीत और सबसे अंत में रावण का रथ था।
लाल-लाल आंखें, चमचमाता मुकुट और बड़ी-बड़ी मूंछें वाले रावण और उसके परिजनों को देखने के लिए यात्रा मार्ग पर लोगों की भीड़ उमड़ती रही। यात्रा रावतपाड़ा तिराहे से सुभाष बाजार, दरेसी, कचहरी घाट, पथवारी, घटिया, कसेरट बाजार होते हुए वापस रावतपाड़ा पर संपन्न हुई। मार्ग में नगरवासियों ने दशानन पर पुष्प वर्षा भी की। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, टीएन अग्रवाल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश अग्रवाल, विनोद जौहरी, मनोज अग्रवाल, मुकेश जौहरी, प्रवीन स्वरूप, अंजुल बंसल, आनंद मंगल आदि मौजूद रहे।
