लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि में दिव्यांगजनों को उत्तम तकनीक पर आधारित कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जाएंगे। विवि प्रशासन बायोटेक्नोलॉजी एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोस्थेटिक्स ऑर्थोटिक्स एवं अस्सिटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध अनुदान के लिए प्रस्ताव भेजेगा।

पुनर्वास विवि में शनिवार को कुलपति प्रो. संजय सिंह की अध्यक्षता में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक समूह के साथ बैठक हुई। इसमें छात्र-छात्राओं की सुविधाओं के मुद्दों पर चर्चा कर प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि बैठक में पैराओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को परिसर में प्रशिक्षण देने पर विचार हुआ। विवि ने खेल मंत्रालय से अनुदान प्राप्त कर स्पोर्ट्स प्रोस्थेटिक, स्पोर्ट्स फिजियोथैरेपी यूनिट एवं स्विमिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। शोधार्थी छात्र-छात्राओं के लिए रामलिंगस्वामी फेलोशिप योजना के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग को प्रस्ताव भेजने की सहमति बनी। दिव्यांग खिलाड़ियों की मांसपेशियों एवं जोड़ों की गतिविधियों पर शोध करने के लिए बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च अस्सिटेंट काउंसिल से कंप्यूटर गेट लाइव की स्थापना, श्रवण बाधित दिव्यांगों के लिए स्किल काउंसिल से मान्यता एवं अनुदान प्रदान करने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। वैज्ञानिक समूह में डॉ. मनोज सिंह रोहिला, डॉ. संजय मिश्रा, डॉ. मनोज कुमार,डॉ. बृजेश मिश्रा, प्रो. वीके सिंह, कुलसचिव रोहित सिंह आदि उपस्थित रहे

पुनर्वास विवि के दीक्षांत में मुख्य अतिथि पद्मश्री मुरलीकांत पेटकर ने राज्यपाल व विभागीय मंत्री की मौजूदगी में परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए स्विमिंग पूल की इच्छा जताई थी। उनके प्रस्ताव पर अमल करने की बात हुई थी। गौरतलब है कि भारत का पहला पैराओलंपिक गोल्ड मेडल मुरलीकांत पेटकर ने स्विमिंग में हासिल किया था।



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