लखनऊ। भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ के साझा अध्ययन के मुताबिक, मासिक धर्म कप का उपयोग माहवारी स्वच्छता के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। आईआईएम लखनऊ की प्रोफेसर प्रियंका शर्मा के साथ ही सिम्बायोसिस सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज नोएडा के डॉ. रिंकू संजीव और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी), पुणे की स्मृति शुक्ला ने यह अध्ययन किया है।
यह अध्ययन जर्नल ऑफ सोशल मार्केटिंग में प्रकाशित हुआ है। प्रो. प्रियंका का कहना है कि अगर इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाए तो न सिर्फ माहवारी स्वच्छता बल्कि पर्यावरणीय अस्थिरता, अपशिष्ट और संक्रमण के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
प्रो. प्रियंका शर्मा ने मुताबिक, मासिक धर्म कप के फायदों के बावजूद अभी इसका उपयोग सीमित है। बाकी विकासशील देशों की तरह भारत में भी अभी इसे लेकर तमाम सामाजिक भ्रांतियां और वर्जनाएं हैं। नीति निर्माताओं का लक्ष्य मासिक धर्म कप के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके लिए भावनात्मकता पर जोर देकर, मासिक धर्म कप के मूल्य और उनके स्थायी लाभों को प्रदर्शित करने, पर्यावरणीय अपशिष्ट को और अधिक प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
यह है मासिक धर्म कप
मासिक धर्म कप सेनेटरी पैड का एक विकल्प है। इसमें मासिक धर्म के प्रवाह को रोकने के बजाय उसे जमा किया जाता है। आठ से 10 घंटे बाद कप को हटाया जाता है। इसे दोबारा इस्तेमाल के लिए धोया जाता है। संक्रमणरहित होने के साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है।
