Revealed: The behavior of sons and parents is worse than that of daughters-in-law, the condition of those who

हेल्पेज इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा।
– फोटो : अमर उजाला

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बुजुर्गों की खराब आर्थिक स्थिति सेहत के साथ उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार की भी बड़ी वजह है। हेल्पेज इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वृद्धों से बुरा बर्ताव करने वालों में 42 प्रतिशत बेटे और 28 फीसदी बहुएं हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को हेल्पेज इंडिया की रिपोर्ट जारी की गई।

इसके अनुसार 40 फीसदी यानी हर तीन में से एक बुजुर्ग को बीते एक साल में कोई आय नहीं मिली। इनमें ज्यादातर संख्या महिलाओं व निरक्षरों की है। सात प्रतिशत बुजुर्गों ने दुर्व्यवहार का शिकार होने की बात स्वीकारी, जबकि पांच फीसदी ने इसका जवाब ही नहीं दिया। अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई कि लोगों ने अपने बुढ़ापे की आर्थिक तैयारी नहीं की थी। इनके पास मामूली बचत थी और ज्यादातर किसी सरकारी योजना में नहीं आते थे। इनमें से 94 फीसदी बुजुर्ग किसी न किसी बीमारी से पीड़ित थे। करीब 79 प्रतिशत वृद्ध बीते एक साल में अस्पताल पहुंचे थे।

अधिकतर बुजुर्ग जिन्होंने दुर्व्यवहार का सामना किया, वे गैर संक्रामक रोग से पीड़ित थे। बताया कि उन्होंने दुर्व्यवहारियों को डांटा या अनुरोध किया। कुछ ने दोस्तों या परिवार के अन्य सदस्यों को बताया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इक्का-दुक्का मामलों में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई।

रिपोर्ट के अनुसार माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के रखरखाव और कल्याण के बारे में सिर्फ नौ फीसदी में ही जागरूकता पाई गई। मौके पर समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, लविवि कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय, वरिष्ठ नागरिक महासमिति के अध्यक्ष श्याम पाल सिंह, समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. राकेश द्विवेदी के साथ सुधीर मिश्रा, मीनू खरे, प्रतीक मेहरा और अनूप पंत मौजूद रहे।

देखभाल में शारीरिक और वित्तीय चुनौतियां

बुजुर्गों की देखभाल करने वालों में से 29 फीसदी ने शारीरिक और 32 प्रतिशत ने वित्तीय चुनौतियों का सामना करने की बात कही। बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की जानकारी सिर्फ 15 फीसदी को ही थी। 31 फीसदी बुजुर्गों ने स्वास्थ्य बीमा तक पहुंच की सूचना दी। स्वास्थ्य बीमा न होने के पीछे मुख्य कारण जागरूकता की कमी (32 फीसदी), इसका खर्च न वहन कर पाना (24 फीसदी) और जरूरत न होना (12 फीसदी) था। सिर्फ 1.5 फीसदी बुजुर्गों ने टेली मेडिसिन परामर्श सेवाओं का उपयोग किया। सात फीसदी बुजुर्गों ने बताया कि वे किसी सामाजिक संगठन के सदस्य थे। इससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहे।

41 फीसदी बुजुर्गों के पास डिजिटल डिवाइस

मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण बुजुर्गों को सक्रिय रहने में मदद कर रहे हैं। 41 फीसदी ने किसी डिजिटल डिवाइस तक पहुंच की सूचना दी। इनमें 48 फीसदी पुरुष और 33 फीसदी महिलाएं थीं। 80 वर्ष से ऊपर के केवल 26 फीसदी बुजुर्गों के पास डिजिटल डिवाइस थी। इनमें से ज्यादातर को इनका इस्तेमाल करने के लिए किसी का सहयोग लेना पड़ता था। वे डिजिटल डिवाइस का उपयोग मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए करते हैं। सिर्फ 12 फीसदी ही इससे ऑनलाइन भुगतान आदि करते हैं।



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