झांसी। तमाम प्रयास के बाद भी परिवहन विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था दलालों के मकड़जाल को नष्ट नहीं कर सकी। आरटीओ कार्यालय में दलालों की घुसपैठ अब भी बरकरार है। इनकी सक्रियता का आलम यह है कि छोटे से बड़े काम के लिए आवेदक आरटीओ कार्यालय जाने के बजाय सीधे दलालों के पास पहुंच रहे हैं। यह आवेदकों से ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर फिटनेस, वाहन पंजीयन सभी प्रकार के कार्याें के दोगुने रेट वसूल रहे हैं।

बृहस्पतिवार को दोपहर 1:10 बजे परिवहन कार्यालय पहुंचकर पड़ताल की गई। आरटीओ व एआरटीओ अपने कक्ष में कार्यालयी कामकाज में जुटे थे। एजेंटों की चहल-पहल कार्यालय प्रांगण के साथ अंदर तक बनी हुई थी। कुछ दलाल आवेदकों से घिरे होकर उन्हें अपने झांसे में लेने का प्रयास कर रहे थे। टीम ने एक एजेंट से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की जानकारी ली तो उसने कहा कि बन जाएगा। दलाल ने बाहर दुकान पर चलने की बात कही लेकिन पहले रेट की बात पूछी गई तो बताया कि लर्निंग का एक हजार और स्थायी का दो हजार देना होगा। यदि टेस्ट नहीं देना है तो इसका अलग से 500 रुपये देना होगा। ऐसे में एक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का कुल 3500 रुपये खर्च आएगा। इसके अतिरिक्त जब और सेवाओं के रेट जानने की कोशिश की गई तो वह माजरा समझकर इधर-उधर हो गया।

आंखों से ही परख रहे वाहनों की सेहत

आरटीओ कार्यालय प्रांगण में फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए एक दर्जन से अधिक वाहन मौजूद दिखे। इनकी जांच संभागीय निरीक्षक द्वारा की जा रही थी। इनके पास न तो कोई मशीन थी और न ही कोई तकनीक। आंखों से ही वाहनों की सेहत परखते दिखाई दिए। वाहनों की फिटनेस जांच के दौरान दलाल आरआई के ईर्द-गिर्द नजर आए। फिटनेस के रेट की बात करें तो छोटे वाहनों का 600 तो बड़े वाहनों का 800 रुपये फीस है लेकिन वाहन स्वामियों से दलाल तीन हजार से 3500 रुपये तक वसूल रहे हैं।

परिवहन सेवाओं के ये हैं सरकारी रेट

छोटे वाहन का नवीन पंजीयन 600 रुपए और बड़े वाहन 800 है। छोटे वाहन का फिटनेस 600 रुपए और बड़े वाहन 800 है। ड्राइविंग लाइसेंस लर्निंग का 350 रुपए और स्थाई 1000 है।

विभाग का दावा दलालों पर है रोक

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि आरटीओ कार्यालय में दलालों के प्रवेश पर रोक हैं। इसके लिए कार्यालय के अंदर गार्ड बैठाया गया है, जो प्रत्येक आने-जाने वाले की इंट्री करता है। सारी सेवाएं ऑनलाइन हैं। आवेदक दलालों के चक्कर में न फंसे, सीधे कार्यालय आएं और अपना कार्य करवाएं। यदि किसी को कोई दिक्कत हैं तो वह सीधे उनसे मिल सकता है। यही नहीं, कार्यालय परिसर पर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे भी यहां लगाए गए हैं। पिछले दिनों फिटनेस प्रमाणपत्र के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत पर संचालकों पर कार्रवाई की गई थी। साथ ही एफआईआर तक दर्ज कराई गई थी।



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