देवबंद (सहारनपुर)। विश्वविख्यात इस्लामी शिक्षण संस्था दारुल उलूम में राब्ता मदारिस-ए-इस्लामिया की वर्किंग कमेटी के एक दिवसीय इजलास में देश के कोने कोने से प्रमुख उलमा शामिल हुए। इजलास में मदरसों को देश और राष्ट्र के लिए ओर अधिक उपयोगी बनाने तथा सामाजिक व्यवस्था में सुधार करने सहित अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई। उलमा ने सरकार द्वारा यूपी के चार हजार मदरसों की जांच कराने के मुद्दे को चिंताजनक बताया।

शनिवार को दारुल उलूम के मेहमानखाने में जलसा देर रात्रि दो चरणों में संपन्न हुआ। इसमें प्रमुख उलमा ने शिक्षा व्यवस्था और वर्तमान हालात को लेकर लंबी चर्चा की। मुख्य रूप से शिक्षा प्रणाली को सक्रिय और स्थिर बनाने, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने तथा मदरसों की लाभप्रदता बढ़ाने, आंतरिक व्यवस्था में सुधार, सामाजिक व्यवस्था में सुधार करने और देश में स्कूलों की स्थापना के लिए प्रयास करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस अवसर पर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मदरसों का उद्देश्य मदरसों की शिक्षा एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मदरसों ने इस्लाम की रक्षा और प्रचार-प्रसार, धार्मिक शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने तथा देश की सेवा करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हमें अपने बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलकर मदरसों की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। उनकी उपयोगिता को बढ़ाना होगा और ऐसी पद्धति अपनानी होगी, जिससे देश और राष्ट्र को अच्छे लोग मिलें।

फलस्तीन के समर्थन की पॉलिसी पर कायम रहे सरकार : उलमा

देवबंद। राब्ता मदारिस-ए-इस्लामिया के इजलास में फलस्तीन को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें फलस्तीन में जारी इस्राइली नरसंहार पर चिंता जताई गई। साथ ही गाजा में हजारों बेकसूर लोगों की मौत को अफसोस जताया तथा जरूरी सुविधाओं पर रोक लगाने की निंदा की। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र संघ और वर्ल्ड मुस्लिम लीग से फलस्तीन की अवाम पर जारी जु्ल्म को रोकने, मानवता के अधिकारों की बहाली और भारत सरकार से फलस्तीन की हिमायत (समर्थन) की पॉलिसी पर कायम रहने की मांग की गई। संवाद



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