मैनपुरी। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में डॉक्टरों की सरकार चल रही है। डॉक्टर सरकारी वेतन तो लेते हैं लेकिन मरीजों को प्राइवेट उपचार के लिए अपने आवास और निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। निशुल्क उपचार की जगह पर मरीजों से मनमाने रुपये वसूले जा रहे हैं। जिम्मेदार इस ओर कुछ ध्यान नहीं देते हैं।

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महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर ओपीडी में आने वाले मरीजों के उपचार में खानापूर्ति करते हैं। अपने साथ अपने दलालों को भी ओपीडी में लेकर आते हैं। दलाल यहां आने वाले मरीजों से कहते हैं कि वे यदि अच्छा उपचार लेना चाहते हैं तो आवास पर पहुंचें। मजबूरी में तीमारदार मरीजों को अस्पताल से आवास पर लेकर पहुंच जाते हैं। यहां मरीजों से अलग से मरीज देखने की फीस ली जाती है। यही नहीं कमीशन वाली दवा लिखकर मोटी कमाई की जा रही है। संवाद

संविदा कर्मचारी देते हैं डॉक्टर के अस्पताल में ले जाने की सलाह

महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर भी मरीजों को अपने निजी अस्पताल में ले जाते हैं। इसके लिए यहां तैनात प्राइवेट कर्मचारी डॉक्टरों की मदद करते हैं। इमरजेंसी में आने वाले घायलों को यहां तैनात संविदा कर्मचारी यह कहते हुए निजी अस्पताल भेज देते हैं कि यहां तो उपचार की कोई उचित व्यवस्था नहीं है यदि मरीज को उचित उपचार कराना चाहते हो तो डॉक्टर साहब के निजी अस्पताल ले जाओ। ईएमओ की ड्यूटी करने वाले कुछ डॉक्टर शहर में अपने परिजन के नाम से निजी अस्पताल भी संचालित कर रहे हैं।

मोटे कमीशन वाले के यहां से कराई जा रही हैं जांचें

सरकारी डॉक्टरों का प्राइवेट उपचार के नाम पर मरीजों के साथ हर प्रकार से कमीशन खोरी का खेल चल रहा है। मरीजों से उपचार के नाम पर 300 रुपये फीस तो ली ही जाती है वहीं जांच और दवाइयों के नाम पर मोटा कमीशन भी लिया जा रहा है। मंगलवार को औंछा थाना क्षेत्र के गांव नगला कनही निवासी शेर सिंह जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे। यहां एक दलाल ने उनसे कहा कि बेहतर उपचार चाहते हो तो डॉक्टर साहब के आवास पर जाओ। यहां जब शेर सिंह पहुंचे तो आवास पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें जांच लिख दी। शेर सिंह ने आवास के पास स्थित एक जांच केंद्र से जांच कराई। जब डॉक्टर को दिखाने पहुंचा तो डॉक्टर ने कहा कि इससे नहीं कौने पर जो दूसरा जांच केंद्र है उससे जांच कराओ। शेर सिंह की पहले जांच मात्र 250 में हुई थी बाद में उसे वहीं जांच 450 रुपये में करानी पड़ी। एलाऊ के विशुनगढ़ निवासी योगेश के साथ भी यही हुआ उसे भी 250 की जांच 450 में करानी पड़ी।

किसी भी सरकारी डॉक्टर को आवास पर मरीज देखने की छूट नहीं है। कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। – डाॅ. मदनलाल, सीएमएस जिला अस्पताल



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