
पूर्व सांसद सलीम शेरवानी।
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व सांसद सलीम शेरवानी का कहना है कि मुसलमान अपने लिए अब विकल्प तलाशने लगे हैं। ये विकल्प कांग्रेस, बसपा या फिर भाजपा में भी मिल सकता है। वह अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श करके इस बारे में जल्द ही कोई निर्णय लेंगे। यहां उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल – आपको कब लगा कि सपा पीडीए से अलग जा रही है?
जवाब- मुसलमान सपा के साथ मजबूती के साथ खड़ा रहा है। राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में एक भी मुसलमान का न होना इसका सबसे बड़ा सुबूत है कि सपा पीडीए से अलग जा रही है।
सवाल- आपको टिकट नहीं दिया, इसलिए आप खफा हो गए?
जवाब- पिछली बार सपा ने जिन्हें राज्यसभा भेजा, उनमें से एक जावेद अली भी थे। मैं राज्यसभा के लिए टिकट पिछली बार भी मांग रहा था, लेकिन जावेद अली का नाम शामिल होने के बाद कोई विरोध नहीं किया। मैंने जावेद अली को भेजे जाने का स्वागत किया था।
सवाल- मुसलमानों के सामने विकल्प क्या है?
जवाब- इसका ही तो राजनीतिक पार्टियां फायदा उठाती रही हैं कि मुसलमानों के सामने कोई विकल्प नहीं है। अब हमें विकल्प ही बनाना है। इस पर विचार-विमर्श के लिए दिल्ली में एक बैठक की है। मुसलमानों के लिए कांग्रेस, बसपा और यहां तक कि भाजपा भी विकल्प हो सकती है।
सवाल- सपा पर पीडीए की थीम से हटने का आप आरोप लगा रहे हैं। इसके परिणाम क्या होंगे?
जवाब- इसमें कोई शक नहीं है कि सपा के सिर्फ नारे में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक शामिल हैं। हकीकत में पार्टी इससे काफी दूर जा चुकी है। निश्चय ही यह स्थिति भविष्य में सपा को नुकसान पहुंचाएगी।
भाजपा के नजदीक जा सकते हैं सलीम शेरवानी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरह से सलीम शेरवानी ने अपने त्यागपत्र में विपक्षी गठबंधन पर सवाल उठाए हैं। इसे बेमानी प्रयास बताते हुए धर्मनिरपेक्षता को दिखावटी करार दिया है। उससे उनके भाजपा के करीब जाने की संभावना ज्यादा जताई जा रही है।
