संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। माेहल्ला तालाबपुरा डोंडाघाट पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य हेमंत कृष्ण महाराज ने सुदामा चरित का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा का जीवन धैर्य, त्याग एवं संतोष के प्रतिमूर्ति थे, इसीलिए तो भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोए।

आचार्य ने कहा कि सुदामा गरीब थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। दरिद्र वह होता है जिसके जीवन में संतोष रूपी धन न हो। सुदामा ने जीवन भर अयाचक व्रत धारण किया था। उन्होंने कहा कि जीवन को व्यवस्थित रखने के लिए सत्संग का होना जरूरी है। दृष्टि अगर सुधर जाए तो सृष्टि भी सुंदर हो जाती है। युवाओं को संदेश देते हुए महाराज ने कहा कि अपने माता पिता और गुरुजनों की वाणी को अवश्य मानना चाहिए।

श्रीकृष्ण ने अपने पुत्रों को बताया कि जीवन में बिगड़ने के चार ही साधन हैं, जिनमें रूप, यौवन, संपत्ति और बड़ा पद। इन चारों को पाने के बाद व्यक्ति सत्संग के अभाव में प्रमादी हो जाता है। इसलिए जीवन में भागवत धर्म का आश्रय करना चाहिए।

चौबीस शिक्षा गुरुओं की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जिससे हमें कुछ सीखने को मिले, वही हमारा सच्चा गुरु है। सद्गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। जीवन में हर व्यक्ति हमें कुछ न कुछ शिक्षा देता है, इसलिए सदैव सकारात्मक रहते हुए सबसे शिक्षा लेनी चाहिए। कथा विश्राम के समय राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ आयोजक परिवार एवं उपस्थित समस्त जनमानस ने फूलों की होली का आनंद प्राप्त किया।

कथा की आरती में मुख्य यजमान राकेश तामियां, अमन तामियां, गीता प्रभुदयाल तामियां, प्रिया अजय तामियां, निशी नीलांश तामियां, रितु विराज तामियां, रामस्वरूप तामियां, सीताराम तामियां, जगदीश तामियां रहे। जबकि, व्यवस्था में सहयोगी के रूप में श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति और श्री भारत सेवा मंडल व्यायामशाला शामिल रही।



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