
आईएफएस निहारिका सिंह।
– फोटो : amar ujala
विस्तार
निवेशकों का 600 करोड़ रुपये हड़पने वाली जालसाज कंपनी अनी बुलियन के निदेशक अजित कुमार गुप्ता की पत्नी निहारिका सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब किया है। भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की अधिकारी निहारिका सिंह इंडोनेशिया की राजधानी बाली के भारतीय वाणिज्यिक दूतावास में काउंसिल जनरल के पद पर तैनात हैं। ईडी ने नोटिस तामील कराने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा है। निहारिका सिंह को नोटिस मिलने के 15 दिन के भीतर लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय में पेश होना होगा।
गौरतलब है कि अनी बुलियन कंपनी के निदेशक ने यूपी समेत कई प्रदेशों में निवेशकों को लुभावनी स्कीम का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराए थे। बाद में ये रकम कई नई कंपनियां खोलकर उसमें ट्रांसफर कर निवेशकों के 600 करोड़ रुपये हड़प लिए गए। इस मामले को लेकर प्रदेश के कई शहरों में अनी बुलियन और उसकी बाकी कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए थे, जिसमें से कई में निहारिका सिंह को भी आरोपी बनाया गया था। ईडी ने इन मुकदमों के आधार पर अनी बुलियन के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
ये भी पढ़ें – लोकसभा चुनाव के लिए आप का मेगाप्लान: 360 विधानसभा और 700 ब्लॉकों में संगठन तैयार करेगी पार्टी
ये भी पढ़ें – राममंदिर निर्माण पर अब तक 345 करोड़ खर्च, दुनिया के कुछ चुनिंदा मंदिरों में होगा शामिल
इस दौरान कंपनी की तमाम चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया था। ईडी की जांच में निहारिका सिंह की घोटाले में भूमिका के कुछ अहम सुराग मिले हैं, जिसकी वजह से उनसे पूछताछ की जानी है। गौरतलब है कि अजित अपनी आईएफएस पत्नी की बड़े नेताओं के साथ फोटो दिखाकर लोगों को ठगता था। कंपनी के कार्यक्रमों में निहारिका सिंह आकर लोगों को उनकी पूंजी सुरक्षित रहने का आश्वासन देती थीं।
कई देशों में रह चुकी हैं तैनात
2006 बैच की आईएफएस निहारिका सिंह 2019 से 2022 तक रोम के भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के पद पर तैनात रह चुकी हैं। इसके अलावा टोक्यो, साउथ कोरिया के अलावा ईस्ट एशिया डिवीजन में डिप्टी सक्रेटरी और ईस्ट एंड सदर्न अफ्रीका डिवीजन में निदेशक के पद पर भी तैनात रह चुकी हैं। लखनऊ के आईटी कॉलेज से स्नातक और कानपुर विश्वविद्यालय से आर्गेनिक केमेस्ट्री में परास्नातक की पढ़ाई के बाद उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ था।
