– दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। लेखपाल को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय ने मां-बेटी को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। बेटी लेखपाल पर शादी का दबाव बना रही थी, जिसमें उसका सहयोग मां भी कर रही थी। इससे परेशान होकर लेखपाल ने छह साल पहले जहर खाकर जान दे दी थी।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ज्ञानस्वरूप राजपूत ने बताया कि महोबा के खरेला निवासी जयपाल प्रजापति (28) टहरौली तहसील में लेखपाल थे। वह अविवाहित थे और तहसील परिसर में बने आवास में रहते थे। 24 मार्च 2018 को लेखपाल के पिता सूरज प्रसाद प्रजापति ने टहरौली थाने में एक तहरीर दी थी, जिसमें बताया था कि गांव की रहने वाली रीमा वर्मा शादीशुदा होने के बावजूद जयपाल पर शादी का दबाव बना रही थी। उसने जयपाल से ब्यूटी पार्लर के लिए 50 हजार और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए 30 हजार रुपये लिए थे। डेढ़ साल से रीमा, उसकी मां रामकुंवर व अन्य उत्पीड़न कर रहे थे। 20 मार्च 2018 को जयपाल ने जहर खा लिया था। अगले दिन 21 मार्च को मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई थी।

मरने से पहले जयपाल ने अपने जीजा गोरेलाल को एक सुसाइड नोट भेजा था, जिसमें रीमा और अन्य को मौत का जिम्मेदार बताया था। पिता ने बेटे जयपाल को जबरन जहर देने का आरोप लगाते हुए रीमा, उसकी मां समेत सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच में हत्या की जगह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का पाया। रीमा और उसकी मां रामकुंवर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश राकेश वर्मा ने मां-बेटी को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई। 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।



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