Shaheen became a black belt in martial arts when her grandmother inspired her.

शाहीन
– फोटो : amar ujala

झांसी। साधारण परिवार में जन्मीं सीपरी बाजार के चित्रा चौराहा की शाहीन परवीन उन बेटियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं हैं, जो यह मानकर घर बैठ जाती हैं कि बिना पैसे के वह आगे नहीं बढ़ पाएंगी। मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट शाहीन के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह इसकी ट्रेनिंग के लिए पैसे खर्च कर कैंप में जा सकें। लेकिन, एक फ्री कैंप ने उनके हौसलों को ऐसा बल दिया कि अब वह हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

शाहीन की दादी पीरन निशा एक समय उनके जींस पहनने के सख्त खिलाफ थीं। जब भी शाहीन ने जींस खरीदने की बात कही तो दादी ने यह कहकर मना कर दिया कि जींस के बदले उन्हें दो सलवार सूट दिला देंगी। लेकिन, जहां आत्मरक्षा की बात आई तो दादी ने शाहीन को मार्शल आर्ट ट्रेनिंग कैंप में जाने के साथ ही उसके लिए पहने जाने वाली ड्रेस की भी हामी भर दी। कठिन परिश्रम का परिणाम यह रहा कि शाहीन को 2006 में येलो बेल्ट मिला और 2010 में ब्लैक बेल्ट की चुनौती को भी पार कर लिया। इसके बाद शाहीन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और इसी साल दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में आयाेजित इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लिया और तीसरे स्थान पर रहीं।

– पैसे के लिए घर-घर पिलाई पोलियो रोधी दवा

मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट शाहीन परवीन ने अपना खर्च चलाने के लिए तीन साल महानगर में घर-घर दस्तक दिया। उन्होंने पैसों की तंगी दूर करने के लिए पोलियो रोधी दवा पिलाया। मेहनत और कुछ कर गुजरने का जुनून लिए शाहीन ने खेल के दौरान ही बीपीएड की डिग्री हासिल की और बेसिक विद्यालय में अनुदेशक के पद पर सेवाएं देना शुरू किया। शाहीन डिस्ट्रिक्ट कोच और बी-ग्रेड की रेफरी भी हैं।

सेना के जवानों को भी दी मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

मार्शल आर्ट में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाली शाहीन परवीन ने झांसी छावनी में सेना के जवानों को भी इसकी ट्रेनिंग दी। इसके अलावा झांसी के लगभग हर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे चुकी हैं।



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