मम्मी, पापा आपको पीट रहे हैं तो आप रातभर के लिए कहीं चली जाओ। पापा हम लोगों को थोड़े न मार देंगे। यह कहना था कौशल्या की बेटी कीर्ति का जब वह उसे लेने के लिए स्कूल पहुंची थी। बेटी की बात का भरोसा कर कौशल्या बच्चों को छोड़कर मायके चली गई और रात में पति ने सबकी गला रेतकर हत्या कर दी।

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Shahjahanpur Murder Case
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कौशल्या की चीखों से सबकी आंखें नम
चंद घंटे पहले भरे-पूरे परिवार को खो देने वाली कौशल्या सुध-बुध खो बैठी है। पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची कौशल्या को परिवार वाले दिलासा देने का प्रयास करते हुए खुद फूट-फूटकर रो रहे थे। कौशल्या की चीखें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

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बेटा ऋषभ
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पति ने ही बुझा दिया चिराग
अपने लला को पुकारकर बिलखती हुई कौशल्या बोलीं कि बच्चों को पालने में खुद कभी चप्पल तक नहीं पहन सकी। बेटा जब तक कोख में रहा, दवाई खाती रही। सोचा था बेटा वंश आगे बढ़ाएगा। मेरे पति ने ही चिराग बुझा दिया। बेटियों को याद कर कौशल्या रह-रहकर बिलखती रहीं।

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हत्यारा पति राजीव
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राजीव के घूंसे से हो गई थी बेहोश
बताया कि दोपहर में उसने दाल-चावल बनाया था। राजीव ने उसे बिना वजह पीटना शुरू कर दिया। उसे घूंसा मारा तो वह बेहोश होकर गिर गई। उसे मारपीट कर घर से भगा दिया था तो वह बेटी के स्कूल पहुंची। बेटी कीर्ति ने कहा कि मम्मी, पापा आपको पीट रहे हैं तो आप रातभर के लिए कहीं चली जाओ। मेरी परीक्षाएं चल रहीं हैं। पापा ने इतनी मुसीबतों के बीच हमें पाला है… हमें थोड़े न मार डालेंगे। छोटे भइया को हम संभाल लेंगे। कीर्ति को यादकर बिलखते हुए कौशल्या बोली कि उसका बच्चों को छोड़कर जाने का मन नहीं था। फिर लगा कि उसके सामने रहने पर पति और गुस्सा करेगा। इस वजह से मायके चली गई। अपने बच्चों को छोड़कर जाने के लिए कौशल्या खुद को दोषी मानती रही।

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राजीव के पिता पृथ्वीराज
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ससुर को कहा था- बच्चों को देखते रहना
बच्चों की याद में रातभर नहीं सो पाई कौशल्या ने बताया कि बच्चों के घर में रहने के कारण उसका मायके में मन नहीं लग रहा था। रातभर रह-रहकर हूक उठती रही। बच्चों की याद में नींद नहीं आ रही थी तो करवटें बदलती रही। उसने ससुर को कॉल करके कहा था कि बच्चों को देखते रहना। पति का दिमाग ठीक नहीं रहता है। पोस्टमॉर्टम हाउस पर ससुर के सामने बिलखते हुए कौशल्या ने कहा कि बार-बार देखते रहने को कहा था फिर भी बच्चों को बचा क्यों नहीं पाए? इस पर ससुर पृथ्वीराज बोले कि दिनभर मजदूरी करने के बाद घर आए थे। रात 12 बजे तक कई बार घर में झांककर देखा था। रात 12 बजे बच्चों और राजीव को सोता हुआ देखा तो अपनी झोंपड़ी में जाकर सो गया। सुबह जाकर देखा तो सबकुछ खत्म हो गया था।
