Shipal Singh's statement is a planning of Samajwadi Party.

शिवपाल सिंह यादव
– फोटो : अमर उजाला

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समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव का कारसेवकों पर गोली चलाने के तत्कालीन मुलायम सरकार के फैसले की वकालत पर दिया गया बयान एक खास रणनीति का हिस्सा है। समाजवादी पार्टी ने उस घटना के बाद जो वोट बैंक हासिल किया, उसे छिटकने न देना इसका उद्देश्य माना जा रहा है। अब यह बात दीगर है कि सपा के ही कुछ नेता इस मौके पर ऐसे बयान देने के बजाय चुप रहने को ज्यादा बेहतर मान रहे हैं।

सपा नेता शिवपाल यादव ने इटावा में कहा कि संविधान की रक्षा करने के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाई गईं। कोर्ट के आदेश का पालन किया गया। सपा सरकार में कारसेवकों पर गोलियां चली थीं? इस सवाल पर शिवपाल ने कहा कि कोर्ट ने उस समय कहा था कि जस की तस स्थिति रखी जाए। सपा नेता ने कहा कि कारसेवकों ने जाकर वहां मस्जिद तोड़ी, बीजेपी हमेशा झूठ बोलती है और झूठ पर राजनीति करती है।

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उधर, सपा में एक धड़ा ऐसा भी है, जो यह मानता है कि जब पूरे देश में राम मंदिर को लेकर बहुसंख्यक आबादी में उत्साह दिख रहा है, तब पुराने मुद्दों पर बयान देना रणनीतिक दृष्टि से उचित नहीं है। हालांकि, पार्टी के भीतर एक पक्ष यह भी है कि इस तरह के बयान से सपा अल्पसंख्यकों को यह संदेश देना चाहती है कि ध्रुवीकरण के इस राजनीतिक माहौल में भी वह अपने पुराने स्टैंड से पीछे नहीं हटी है।

मालूम रहे कि इससे पहले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी कारसेवकों पर 1990 में हुई फायरिंग की घटना को जायज बताया था। स्वामी ने कहा था कि तत्कालीन सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था। इस तरह के बयानों से भाजपा को भी सपा पर हमला बोलने का एक और मौका मिला है।



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